अंकिता हत्याकांड: कांग्रेस का सीबीआई जांच पर फिर से हमला, CM की चुप्पी पर उठे सवाल
अंकिता हत्याकांड: कांग्रेस का सीबीआई जांच पर फिर से हमला
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कम शब्दों में कहें तो, अंकिता भंडारी की हत्या मामले में सीबीआई जांच के मुद्दे पर कांग्रेस ने एक बार फिर दिल्ली में आक्रमण किया, जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कथित संस्तुति के बावजूद जांच में हो रही देरी के चलते सवाल उठने लगे हैं।
नई दिल्ली। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस ने दिल्ली में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया, जहाँ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। गोदियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के द्वारा सीबीआई जांच की संस्तुति किए जाने के 15 दिनों बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि जांच का औपचारिक आदेश अब तक दिया गया है या नहीं।
गोदियाल का आरोप है कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार जांच को भटकाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी सीबीआई ने कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं दी है और इस पर संदेह जताया कि सरकार ने सीबीआई को संबंधित दस्तावेज सौंपे हैं या नहीं।
क्या है मामला?
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि अंकिता के माता-पिता की जनहित याचिका को ध्यान में रखते हुए सीबीआई जांच की संस्तुति की जानी चाहिए थी। लेकिन सरकारी पक्ष ने एक तीसरे पक्ष की शिकायत पर जांच कराने की बात की। इससे यह सवाल उठता है कि क्या जांच को जानबूझकर कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
गोदियाल ने यह भी कहा कि जब मुख्यमंत्री ने अंकिता के माता-पिता से मिलने के बाद यह कहा था कि उनके सुझाव के अनुसार जांच की जाएगी, तो अब ये सवाल उठता है कि क्या सरकार ने उसे नजरअंदाज किया है।
नार्को टेस्ट की मांग और राजनीतिक उठापटक
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मामले के मुख्य आरोपियों द्वारा नार्को टेस्ट की मांग करने के बावजूद सरकारी पक्ष ने इसका विरोध किया। यह एक आपराधिक मामले में अत्यंत दुर्लभ स्थिति है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कहीं न कहीं सत्ता में बैठे लोग जांच को प्रभावित करना चाहते हैं।
गोदियाल ने इस बात की भी मांग की कि जांच के सभी बिंदुओं को स्पष्ट किया जाए, और जो वरिष्ठ अधिकारी सीबीआई में हैं, उन्हें भी इस जांच प्रक्रिया से हटाया जाए।
इसके साथ ही, उन्होंने उत्तराखंड के उधम सिंह नगर में एक किसान की आत्महत्या के मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें किसान ने पुलिस अधिकारियों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया था।
भाजपा का बचाव और कांग्रेस की रणनीति
भाजपा ने अपने बचाव में कहा है कि कांग्रेस केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए इस मुद्दे को भुना रही है। हालाँकि, कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी और मल्लिकाकी चर्चा में भविष्य की रणनीति पर विचार किया जा रहा है, जिसमें अंकिता हत्याकांड को फिर से मुख्य मुद्दा बनाने का प्रयास शामिल है।
दिसंबर 2025 में इस मामले से संबंधित एक और भडंके के बाद राजनीति में हलचल पैदा हुई थी, जहां पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर की फोन पर बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ था। इस ऑडियो के बाद भाजपा के खिलाफ कई संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए।
कांग्रेस पार्टी के सूत्रों का कहना है कि वह इस मुद्दे को फिर से जनता के सामने लाने की तैयारी कर रही है। मामले की पेचीदगियां और जनता की अपेक्षाएँ
इस मामले में जनहित की मांग और सीबीआई जांच की कमी इस बात का संकेत देती है कि लोग सरकार के वादों पर कितना संदेह कर रहे हैं। जनता को अब भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की उम्मीद है, और इसके लिए वे लगातार आवाज उठा रहे हैं।
सीबीआई जांच की स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है और ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाए। कांग्रेस पार्टी और अन्य संगठनों की जांच की समय सीमा, किसी भी आधार पर जनता का भरोसा पुनर्स्थापित करने का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू बन गया है।
अंकिता हत्याकांड की न्याय की अपेक्षा पर नजरें टिकी हैं। जांच को निष्पक्षता और पारदर्शिता से संपन्न करने की आवश्यकता है।
इसके लिए पहले से ही चुनावी तैयारियाँ हो रही हैं, और कांग्रेस इस मुद्दे को अपनी चुनावी मुहिम का आधार बनाने के लिए तैयार है।
सभी की आँखें अब सीबीआई जांच और उसके निष्कर्षों पर लगी हैं।
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साइन ऑफ: टीम अमृत बाजार पत्रिका (सत्या शर्मा)
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