हिमालय संरक्षण में सरकार की प्रतिबद्धता, मुख्यमंत्री ने दिए महत्वपूर्ण संदेश

Sep 9, 2025 - 21:44
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हिमालय संरक्षण में सरकार की प्रतिबद्धता, मुख्यमंत्री ने दिए महत्वपूर्ण संदेश
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालय संरक्षण के प्रति सरकारी प्रयासों पर जोर देते हुए सभी नागरिकों से सहयोग की अपील की है।

मंगलवार को आईआरडीटी सभागार में हिमालय दिवस समारोह को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमालय केवल बर्फ़ीली चोटियों का समूह नहीं है, बल्कि यह भारतीय उपमहाद्वीप का जीवनदायिनी स्रोत है। हिमालय की पर्वतीय नदियाँ देश की जीवनधारा हैं और इसकी जैव विविधता भी हमारे पर्यावरण की स्थिरता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “आज हम इस अनमोल धरोहर की रक्षा को गंभीर खतरे में देखते हैं। जलवायु परिवर्तन, अंधाधुंध विकास और प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग हिमालय के पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहा है। ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे आने वाले समय में जल संकट और पारिस्थितिक असंतुलन की संभावना बढ़ रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि हिमालयी क्षेत्र में बारिश की तीव्रता बढ़ती जा रही है और इसके परिणामस्वरूप आने वाली आपदाएँ, जैसे क्लाउड बर्स्ट और भूस्खलन, अत्यंत चिंताजनक हैं। इन घटनाओं की आवृत्ति में वृद्धि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के बीच समन्वय की आवश्यकता को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री धामी ने हाल ही में हुई प्राकृतिक आपदाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे प्रभावी रूप से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। सरकार इस साल नवंबर में 'विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन' का आयोजन भी कर रही है, जिसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर चर्चा करना है।

इस संदर्भ में, उन्होंने जानकारी दी कि सरकार डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ग्लेशियर रिसर्च सेंटर, जल स्रोत संरक्षण अभियान और जनभागेदारी कार्यक्रमों के माध्यम से हिमालय के दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित कर रही है।

मुख्यमंत्री ने राज्य में प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन के लिए “डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम” की शुरुआत की भी बात की, जिसके जरिए हिमालयी क्षेत्र में 72 टन कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सफलता मिली है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

उन्होंने पर्यटन क्षेत्र में भी सतत विकास का महत्व बताया और कहा कि अनियंत्रित पर्यटन हिमालय के प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुँचा रहा है। इसके लिए हमें "सस्टेनेबल टूरिज्म" का अभ्यास करना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, “हिमालयी क्षेत्र में रहने वालों का ज्ञान और परंपराएँ हमें सिखाती हैं कि हम प्रकृति के साथ कैसे सामंजस्य स्थापित कर सकते हैं। छोटे-छोटे प्रयास, जैसे पानी की बचत और वृक्षारोपण, हमारी ज़िम्मेदारी बनती है।” उन्होंने सरकार द्वारा हर वर्ष दो से नौ सितंबर तक हिमालय जनजागरूकता सप्ताह मनाने का निर्णय भी साझा किया।

इस अवसर पर पद्मभूषण अनिल प्रकाश जोशी ने कहा, "इस साल हिमालयी क्षेत्र में आई आपदाओं ने हमें सोचने पर मजबूर किया है। हमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई सोच और दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।”

हिमालय का संरक्षण केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री धामी ने यह संदेश स्पष्ट किया कि हमारे लिए यह आवश्यक है कि हम इस अद्वितीय प्राकृतिक धरोहर की रक्षा करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखें।

इस प्रकार, हिमालय संरक्षण में सरकार की प्रतिबद्धता और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से हम एक सुंदर और सुरक्षित पर्यावरण का सपना देख सकते हैं।

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— टीम अमृता बाजार पत्रिका, राधिका शर्मा

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