उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम, हर जिले में बनेंगे 10 मास्टर ट्रेनर

Sep 19, 2026 - 21:44
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उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम, हर जिले में बनेंगे 10 मास्टर ट्रेनर

उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम की नई पहल

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। हर जिले में 10 मास्टर ट्रेनर बनाए जाएंगे, जो आपदा के दौरान संभावित जोखिमों का प्रभावी प्रबंधन करेंगे।

देहरादून। राज्य में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) के सहयोग से आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास कार्यक्रमों को संचालित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत, राज्य से लेकर जिला स्तर तक सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, प्रशिक्षण संस्थानों और विभिन्न विभागों से जुड़े कार्मिकों को आपदा प्रबंधन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, खोज एवं बचाव तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षित किया जाएगा। इस प्रक्रिया को नियमित एवं चरणबद्ध तरीके से संचालित करने के लिए वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर भी तैयार किया जाएगा।

प्रशिक्षण आयोजित करने के लिए नई दृष्टिकोण

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) के कार्यकारी निदेशक, मधूप व्यास ने शनिवार को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का दौरा किया। इस दौरान, उन्होंने यूएसडीएमए के अधिकारियों के साथ आपदा प्रबंधन में चल रही गतिविधियों की जानकारी साझा की और आगामी प्रशिक्षण कैलेंडर पर विस्तार में चर्चा की। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, विनोद कुमार सुमन ने यूएसडीएमए के कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।

उत्तराखंड की भौगोलिक चुनौतियाँ

मधूप व्यास ने कहा कि उत्तराखंड एक संवेदनशील राज्य है, जहां भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा हर समय बना रहता है। ऐसे में, आपदा के प्रभावी प्रबंधन के लिए तैयारी और प्रशिक्षण आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से चलाने की आवश्यकता है ताकि राज्य आपदाओं के प्रति सुसज्जित और सतर्क रह सके।

मुख्य बिंदु: मास्टर ट्रेनर की भूमिका

इस कार्यक्रम के पहले चरण में, हर जिले में 10 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे, जिन्हें आपदा प्रबंधन के विभिन्न विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने जिलों में संबंधित विभागों, कार्मिकों और अन्य हितधारकों को प्रशिक्षित करेंगे। इसके साथ ही, राज्य स्तर पर भी मास्टर ट्रेनर्स का एक समूह तैयार किया जाएगा, जो जिला स्तर के ट्रेनर्स को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन में सहायता करेगा।

प्रशिक्षण के महत्व पर बल

बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि आपदा प्रबंधन में प्रभावी क्षमता विकास के लिए निरंतर प्रशिक्षण, अभ्यास और अनुभव से सीखने की प्रक्रिया को जारी रखना आवश्यक है। इसके अलावाक, आयोजन में मॉक ड्रिल और व्यावहारिक गतिविधियों को भी महत्व दिया जाएगा, जिससे प्रशिक्षित कर्मियों को वास्तविक आपदा की स्थिति में अपने दायित्व निभाने में मदद मिलेगी।

सरकार का दृष्टिकोण

विनोद कुमार सुमन ने कहा कि यूएसडीएमए द्वारा राज्य में आपदा प्रबंधन की क्षमता को मजबूत किया जाएगा, जिसमें प्रशिक्षण कार्यक्रमों को स्थानीय आवश्यकताओं और आपदा जोखिमों के अनुरूप डिजाइन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य एक प्रशिक्षित मानवशक्ति तैयार करना है जो आपदा से पहले की तैयारी, आपदा के दौरान की त्वरित प्रतिक्रिया, और आपदा के बाद राहत और पुनर्बहाली कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।

उत्तराखंड में विभिन्न प्रकार की आपदाओं का सामना करते हुए यह प्रशिक्षण न केवल सरकारी अधिकारियों, बल्कि आम जनता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य जनता के बीच जागरूकता लाना और उन्हें आपदा के समय में सुरक्षित एवं समन्वित प्रतिक्रिया देने के लिए सक्षम बनाना है।

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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका

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