उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों की मॉनिटरिंग के लिए तकनीकी तैयारी, आपदा प्रबंधन को मिली नई दिशा
उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों की मॉनिटरिंग के लिए तकनीकी तैयारी, आपदा प्रबंधन को मिली नई दिशा
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों के संभावित खतरों को देखते हुए, आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से इनके निगरानी और जोखिम न्यूनीकरण की दिशा में आज महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
देहरादून। राज्य में ग्लेशियर झीलों का हालात जटिल होने के कारण आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री, मदन कौशिक, ने कहा है कि इन झीलों की निगरानी के लिए विश्व स्तर पर उपलब्ध आधुनिक तकनीकों का उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है। रविवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) में आयोजित बैठक में उन्होंने उत्तराखंड में स्थित ग्लेशियर झीलों की स्थिति की व्यापक जानकारी ली।
ग्लेशियर झीलों की निगरानी प्रणाली का निर्माण
कौशिक ने बताया कि उत्तराखंड भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील है और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखकर ग्लेशियर झीलों की स्थिति में हो रहे बदलावों की वैज्ञानिक रूप से निगरानी आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिया कि झीलों के जल स्तर, आकार, जलभराव की स्थिति तथा उससे संबंधित संभावित बदलावों पर नियमित तौर पर नजर रखी जाए।
मंत्री ने कहा कि इसके लिए सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन और सेंसर आधारित तकनीकों का उपयोग किया जाए। साथ ही संबंधित विभागों, विशेषज्ञ संस्थानों और तकनीकी एजेंसियों के बीच समन्वय भी स्थापित करने की आवश्यकता है। उन्होंने अर्ली वार्निंग सिस्टम्स लगाने की बात भी कही ताकि प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को समय पर सतर्क किया जा सके।
आपदा प्रबंधन की तत्परता
कौशिक ने प्रदेश में हाल ही में हो रही अवधिक वर्षा की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जनजीवन की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी विभागों को 24×7 अलर्ट मोड पर कार्य करने के लिए निर्देशित किया गया है।
मंत्री ने कहा कि वन्ययों के जल स्तर, बंद सड़कों, भूस्खलन, बिजली, पेयजल और संचार सेवाओं के स्थिति की जानकारी लेना आवश्यक है। सभी परिस्थितियों पर सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।
सड़क सुरक्षा और आपातकालीन सेवाएँ
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र को सभी जनपदों के साथ निरंतर समन्वय बनाने के निर्देश दिए गए हैं। बंद सड़कों को शीघ्र खोलने के लिए प्राथमिकता देने की बात की गई, और भूस्खलन संभावित स्थलों पर मशीनरी रखने का सुझाव दिया गया।
जलभराव वाले क्षेत्रों में जल निकासी सुनिश्चित करने के साथ पंप तथा अन्य आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है। सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके।
यात्रा संचालन से संबंधित नियम
मंत्री कौशिक ने निर्देश दिया कि यात्रा संचालन मौसम एवं मार्ग की स्थिति के अनुसार ही किया जाए। अगर अत्यधिक वर्षा या मार्ग अवरुद्ध होता है तो यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोककर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
नदियों के जल स्तर की चौबीसों घंटे निगरानी
नदियों के जल स्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को जागरूक किया जाएगा और खतरे की आशंका होने पर उन्हें समय रहते सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाएगा।
संचार व्यवस्था का धावक
यदि भारी वर्षा या भूस्खलन के कारण किसी क्षेत्र में संचार व्यवस्था बाधित होती है तो वैकल्पिक संचार प्रणाली को तुरंत सक्रिय किया जाएगा। यह विशेष रूप से दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में अहम होगा।
विशेष जनसंख्या की निगरानी
गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों की विशेष देखभाल की जाएगी। आवश्यकतानुसार समय पर चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। मंत्री ने कहा कि चिकित्सा सहायता की कमी नहीं होनी चाहिए।
डेंगू की रोकथाम में कड़े कदम
अंत में, मंत्री ने डेंगू की रोकथाम के लिए भी युद्धस्तर पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी नगर निगमों और पंचायतों को जलभराव वाले स्थानों की पहचान करके साफ-सफाई और फॉगिंग अभियान चलाने का निर्देश दिया। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू जांच किट और चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
इस महत्वपूर्ण दिशा निर्देशों के माध्यम से उत्तराखंड सरकार ने आपदा प्रबंधन और जोखिम न्यूनीकरण के लिए ठोस कदम उठाए हैं, जिससे राज्य के नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता में रखा गए है।
स्रोत: Amrita Bazaar Patrika
सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका - प्रियंका शर्मा
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