उत्तराखंड में ‘भुली’ कार्यक्रम का उद्घाटन, ग्रामीण महिला उद्यमिता को मिलेगा नया आयाम

Jul 15, 2026 - 07:44
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उत्तराखंड में ‘भुली’ कार्यक्रम का उद्घाटन, ग्रामीण महिला उद्यमिता को मिलेगा नया आयाम
उत्तराखंड में ‘भुली’ कार्यक्रम का उद्घाटन, ग्रामीण महिला उद्यमिता को मिलेगा नया आयाम

उत्तराखंड में ‘भुली’ कार्यक्रम का उद्घाटन, ग्रामीण महिला उद्यमिता को मिलेगा नया आयाम

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड ने ग्रामीण महिला उद्यमिता को नई दिशा देते हुए अपने क्षेत्र में 'भुली' इन्क्यूबेशन कार्यक्रम की स्थापना की है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को नए अवसर मिलेंगे।

देहरादून, 14 जुलाई। उत्तराखंड ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत ग्रामीण उद्यम इन्क्यूबेशन कार्यक्रम ‘भुली (BHULI)’ का औपचारिक शुभारंभ कर उत्तर भारत में एक नया अध्याय शुरू किया है। यह पहल उत्तर भारत में ग्रामीण उद्यम इन्क्यूबेशन शुरू करने वाला पहला राज्य होने का गौरव भी प्राप्त करती है।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन देहरादून स्थित सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट (सीएसआई) में किया गया। यहां ‘Business & Handholding Unit for Livelihood Incubation (BHULI)’ का औपचारिक शुभारंभ हुआ, जिसमें कार्यक्रम का एक ऑनलाइन पोर्टल और बुकलेट भी लॉन्च की गई। कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से आई स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिला उद्यमियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी का आयोजन किया, जो दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने में सफल रही।

सामाजिक एवं आर्थिक बदलाव की बुनियाद

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, ग्राम्य विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी ने कहा कि ‘भुली’ कार्यक्रम केवल एक योजना नहीं बल्कि उत्तराखंड की मातृशक्ति के सपनों को संभावनाओं में बदलने का एक प्लेटफार्म है। मंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत 150 महिला उद्यमियों को जोड़ा जाएगा, वहीं भविष्य में इसे सभी जनपदों में फ़ैलाने की योजना है।

मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार स्वयं सहायता समूहों को स्कूलों और पुलिस की वर्दी निर्माण जैसे कार्यों से जोड़ने के साथ-साथ पशुपालन, डेयरी और अन्य स्वरोजगार के क्षेत्रों में नए अवसर प्रदान करने के लिए कदम उठा रही है।

भुली कार्यक्रम से होने वाले लाभ

उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूएसआरएलएम) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी झरना कमठान ने बताया कि भुली कार्यक्रम को आईआईएम काशीपुर के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट (FIED) के तकनीकी समर्थन से संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत 150 महिला उद्यमियों का चयन किया जाएगा, जिसमें 18 सबसे उत्कृष्ट उद्यमियों को 15 लाख रुपये तक का अनुदान और 132 उद्यमियों को 4 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण दिया जाएगा।

यह निश्चित रूप से उन महिलाओं को एक नई दिशा दिखाएगा जो अपने कौशल को व्यवसाय में बदलने की सोच रही हैं। साथ ही, अन्य इच्छुक महिलाओं को भी इस कार्यक्रम में प्रशिक्षण और व्यवसायिक मार्गदर्शन दिया जाएगा।

आर्थिक विकास का नया रास्ता

कार्यक्रम की 18 माह की इन्क्यूबेशन प्रक्रिया का प्राथमिक लक्ष्य उद्यमों की आय में 15 से 20 प्रतिशत तक सुधार करना है। ग्राम्य विकास विभाग के सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने कहा कि यह योजना स्वयं सहायता समूहों के पारंपरिक कौशल को व्यवसायिक रूप में बदलने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

आईआईएम काशीपुर के निदेशक प्रोफेसर नीरज द्विवेदी ने कहा कि भुली परियोजना ग्रामीण महिला उद्यमियों को व्यावसायिक प्रबंधन से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे उनके छोटे उद्यमों को नई पहचान और बेहतर बाजार उपलब्ध होगा।

कार्यक्रम के समापन के मौके पर विभिन्न जिलों से आई महिला उद्यमियों को सम्मानित भी किया गया। अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रदीप कुमार पाण्डेय ने कहा कि सभी हितधारक योजना का अधिकतम लाभ उठाने का प्रयास करें।

इस कार्यक्रम में ग्राम्य विकास विभाग की आयुक्त अनुराधा पाल, एफआईईडी के कार्यक्रम समन्वयक प्रो. सफल बत्रा, और यूएसआरएलएम के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। सभी 13 जनपदों से बड़ी संख्या में महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यें इस अवसर पर उपस्थित थीं।

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टीम अमृता बाजार पत्रिका (नीरजा शर्मा)

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