उत्तराखंड में लंपी बीमारी का प्रभाव: सरकार ने 2.10 लाख पशुओं का किया टीकाकरण

Sep 22, 2026 - 21:44
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उत्तराखंड में लंपी बीमारी का प्रभाव: सरकार ने 2.10 लाख पशुओं का किया टीकाकरण

उत्तराखंड में लंपी बीमारी का सामना: पशुपालन मंत्री की समीक्षा बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में लंपी स्किन डिजीज (LSD) के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए सरकार द्वारा विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है।

देहरादून। हाल ही में उत्तराखंड में पशुओं के बीच फैल रहे लंपी स्किन डिजीज की रोकथाम के लिए पशुपालन मंत्री की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक यमुना कॉलोनी स्थित कैंप कार्यालय में हुई, जिसमें बीमारी की वर्तमान स्थिति, टीकाकरण और पशुओं के उपचार पर विस्तृत चर्चा की गई।

पशुपालन विभाग के निदेशक ने बताया कि प्रदेश में पहला संदिग्ध मामला 21 जून 2026 को हल्द्वानी में पाया गया था। इसके बाद से ही विभाग ने टीकाकरण और जागरूकता को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब तक कुल 2 लाख 10 हजार 89 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है, जिसमें 24 स्थानों पर 3 किलोमीटर की परिधि में रिंग वैक्सीनेशन भी शामिल है। इस प्रक्रिया के तहत 28 हजार 243 टीके लगाए गए हैं। इस वर्ष अब तक कुल 11 लाख 41 हजार 519 टीके लगाए जा चुके हैं।

पशुपालकों की जागरूकता बढ़ाने के लिए शिविर

पशुपालकों को लंपी बीमारी के लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में जागरूक करने के लिए गांवों में 663 शिविर लगाए गए। इन शिविरों में 15 हजार 180 पशुओं का उपचार किया गया। इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर 4,603 पशुओं को उपचार और टीकाकरण देने की व्यवस्था की गई है। इस प्रयास का उद्देश्य बीमारी की तेजी से रोकथाम करना है।

बिमार पशुओं की स्थिति

विभाग के अनुसार, अब तक 1,151 बिमार पशुओं की पहचान हुई है, जिनमें से 942 स्वस्थ हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, बीमारी की जांच के लिए 466 पशुओं के ब्लड सैंपल लिए गए हैं, जिनकी रिपोर्ट में 135 निगेटिव और 63 पॉजिटिव पाए गए हैं। इस डेटा के जरिए विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि बीमारी की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयास सकारात्मक दिशा में जा रहे हैं।

भविष्य के लिए योजना

बैठक में मौजूद अधिकारियों ने जानकारी दी कि अब तक प्रदेश में लंपी बीमारी से केवल एक पशु की मृत्यु हुई है, जबकि पिछले वर्ष इस बीमारी के कारण 786 पशुओं की मौत हुई थी। इस संबंध में पशुपालन मंत्री ने सभी जिलों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का निर्देश दिया है ताकि प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई की जा सके।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करें और बीमारी की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाएं। सरकार का लक्ष्य न केवल बीमारी की निगरानी करना है, बल्कि इसके प्रभावी उपचार की भी सुनिश्चितता देना है।

सरकारी प्रोटोकॉल का पालन

ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारी की निगरानी और उपचार की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक है। सभी मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और उचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पशुपालन विभाग की योजनाओं को पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए और उनकी जानकारी अधिक से अधिक पशुपालकों तक पहुंचाई जाए। इस काम में विभाग के सचिव, अपर सचिव, निदेशक, और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

इस तरह की संभावित बिमारियों की रोकथाम में सरकार के साथ जन जागरूकता कार्यक्रमों को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि पशुपालक सही समय पर आवश्यक कदम उठा सके।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया यहां क्लिक करें.

टीम अमृता बाजार पत्रिका

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