उत्तराखंड संस्कृत संस्थान में धूमधाम से हरेला पर्व का आयोजन

Jul 18, 2026 - 14:44
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उत्तराखंड संस्कृत संस्थान में धूमधाम से हरेला पर्व का आयोजन
उत्तराखंड संस्कृत संस्थान में धूमधाम से हरेला पर्व का आयोजन

उत्तराखंड संस्कृत संस्थान में धूमधाम से हरेला पर्व का आयोजन

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड संस्कृत संस्थान में हरेला पर्व का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया गया, जहां पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।

हरिद्वार – उत्तराखंड संस्कृत संस्थान ने इस साल हरेला पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस अवसर पर सचिव संस्कृत शिक्षा, दीपक कुमार ने संस्थान परिसर में फलदार वृक्षों का रोपण किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य एक ओर जहां पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है, वहीं दूसरी ओर संस्कृत शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना भी है।

वृक्षों का महत्व: दीपक कुमार ने इस अवसर पर कहा कि "हमें अपने जीवन में साल में कम से कम एक वृक्ष अवश्य लगाना चाहिए। वृक्ष केवल प्रकृति का श्रृंगार नहीं हैं, बल्कि हमारी अमूल्य धरोहर भी हैं।" उन्होंने उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं दी और उनसे पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी का ध्यान रखने का आग्रह किया।

सचिव ने आगे कहा कि "संस्थान में आयोजित होने वाली आगामी प्रतियोगिताओं, शोध सम्मेलनों और प्रकाशनों की रूपरेखा को जल्द ही बनाकर प्रस्तुत करें। संस्कृत के संवर्धन, संरक्षण और प्रचार-प्रसार में हमें गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।"

विशेष आमंत्रित अतिथि: इस अवसर पर संस्थान के नवनियुक्त सचिव प्रो विनय कुमार विद्यालंकार ने कहा कि "हमारी जिम्मेदारी है कि हम उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा को उचित सम्मान और प्रतिष्ठा दिलाने के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहें।"

इस कार्यक्रम में संस्थान के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे, जैसे कि शोध अधिकारी डॉ. हरीश चन्द्र गुरुरानी, प्रकाशन अधिकारी किशोरी लाल रतूड़ी, सहायक पुस्तकालयाध्य रमा कठैत और कई अन्य कर्मचारी।

इस आयोजन ने न केवल हरेला पर्व की महत्ता को उजागर किया बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी सबको जागरूक किया। वृक्षारोपण कार्यक्रम ने सभी को एकजुट होकर कार्य करने का एक नया दृष्टिकोण दिया।

उपस्थिति में सभी लोगों का उत्साह झलक रहा था और उन्होंने मिलकर इस पर्व को स्मरणीय बनाने का प्रयास किया।

हरेला पर्व मनाने का उद्देश्य केवल परंपरा का पालन करना नहीं बल्कि हमारे पर्यावरण का संरक्षण करना भी है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ और स्वच्छ पर्यावरण मिल सके।

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सादर,
Team Amrita Bazaar Patrika
सुषमा तिवारी

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