उत्तराखण्ड का आपदा प्रबंधन माॅडल: श्रीलंका के अधिकारियों को भाया, यूएसडीएमए का भ्रमण

Jul 6, 2026 - 21:44
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उत्तराखण्ड का आपदा प्रबंधन माॅडल: श्रीलंका के अधिकारियों को भाया, यूएसडीएमए का भ्रमण
उत्तराखण्ड का आपदा प्रबंधन माॅडल: श्रीलंका के अधिकारियों को भाया, यूएसडीएमए का भ्रमण

उत्तराखण्ड का आपदा प्रबंधन माॅडल: श्रीलंका के अधिकारियों को भाया, यूएसडीएमए का भ्रमण

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) ने 40 श्रीलंकाई अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया, जिन्होंने आपदा प्रबंधन उपायों और नई तकनीकों पर विस्तृत अध्ययन किया।

देहरादून। हाल ही में राष्ट्रीय केंद्र फॉर गुड गवर्नेंस (एनसीजीजी) के अंतर्गत आयोजित आपदा प्रबंधन कार्यशाला में, श्रीलंका के 40 सिविल सेवा अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का दौरा किया। यह कार्यक्रम आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में क्षमता निर्माण पर केंद्रित था, जिसमें श्रीलंका के प्रतिनिधियों ने उत्तराखण्ड में लागू आपदा प्रबंधन प्रणालियों और आधुनिक तकनीकों का गहन अध्ययन किया।

आपदा प्रबंधन प्रणाली की संक्षिप्त जानकारी

यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए बताया कि उत्तराखण्ड जैसे संवेदनशील क्षेत्र में आपदा प्रबंधन केवल विपत्ति के समय राहत कार्यों तक सीमित नहीं है। यह एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, संस्थागत समन्वय, क्षमता निर्माण और आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग शामिल है। उन्होंने स्थानीय समुदायों और वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से आपदा प्रबंधन की प्रभावशीलता पर जोर दिया।

संक्रमण के समय तैयारियों पर ध्यान

यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी राजकुमार नेगी ने आपदा के दौरान त्वरित और समन्वित राहत कार्यों के लिए मजबूत संस्थागत तंत्र के विकास के बारे में बताया। उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) और जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों (डीईओसी) के कार्य प्रबंधन, घटना प्रतिक्रिया प्रणाली (आईआरएस), और विभिन्न पूर्व चेतावनी तंत्रों के कार्यान्वयन के बारे में जानकारी साझा की।

मौसम पूर्वानुमान प्रणाली की संक्षिप्त जानकारी

मौसम विशेषज्ञ डॉ. पूजा राणा ने प्रतिनिधिमंडल को राज्य की मौसम पूर्वानुमान और पूर्व चेतावनी प्रणाली के विकास के बारे में बताया। मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने उपग्रह-आधारित अवलोकन प्रणाली, डॉप्लर वेदर रडार, स्वचालित मौसम केंद्र और अन्य आधुनिक उपकरणों के माध्यम से मौसम डेटा इकट्ठा करने की प्रक्रिया को समझाया। इस प्रकार के डेटा का रियल टाइम विश्लेषण कर विभिन्न पूर्वानुमान तैयार किए जाते हैं, जिससे आपात स्थितियों से बेहतर निपटा जा सके।

भूस्खलन के जोखिम न्यूनीकरण के उपाय

उत्तराखण्ड भू-स्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (यूएलएमएमसी) के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार ने बताया कि राज्य में भूस्खलन के जोखिम को कम करने के लिए कई वैज्ञानिक और तकनीकी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि संवेदनशील ढलानों का विस्तृत भू-तकनीकी अध्ययन, रिमोट सेंसिंग, जीआईएस आधारित मानचित्रण, ड्रोन सर्वेक्षण और वर्षा आधारित भूस्खलन विश्लेषण जैसे आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस तरह के अध्ययन कार्यक्रम आपदा प्रबंधन क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करने से संस्थागत दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण मदद मिलती है। उत्तराखण्ड के विकसित मॉडल अन्य देशों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

क्षमता निर्माण में योगदान

एनसीजीजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ए.पी. सिंह ने कहा कि नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस ने अब तक 52 देशों के सिविल सेवकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। उन्होंने बताया कि यह अध्ययन भ्रमण श्रीलंका सरकार के साथ सहयोग कार्यक्रम के तहत हुआ है।

उत्तराखण्ड प्रदेश का आपदा प्रबंधन मॉडल न केवल संवेदनशील प्रांतों के लिए, बल्कि अन्य देशों के लिए भी उत्कृष्टता का एक उदाहरण बन गया है। ऐसे कार्यक्रमों से न केवल क्षेत्रीय सहयोग संभव होता है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भी आपदाओं से निपटने में सक्षम बनाता है।

अतः, उत्तराखण्ड की आपदा प्रबंधन प्रणाली पर श्रीलंका के अधिकारियों की रुचि यह इंगित करती है कि विभिन्न देशों के बीच सहयोग और आदान-प्रदान से आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में नई तरकीबें और उपाय विकसित हो सकते हैं।

इसके लिए और अधिक जानकारी के लिए, कृपया यहां क्लिक करें.

सादर,
टीम अम्रिता बाजार पत्रिका
अनामिका शुक्ला

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