उत्तराखण्ड के छोटे- बड़े शहरों के मास्टर प्लान जल्द ही होंगे तैयार - एक नई दिशा
उत्तराखण्ड के छोटे- बड़े शहरों के मास्टर प्लान जल्द ही होंगे तैयार
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में छोटे और बड़े शहरों के लिए महायोजनाओं की तैयारी तेजी से की जा रही है। ये मास्टर प्लान शहरों के सुनियोजित विकास का आधार बनेगें तथा प्रदेश की शहरी व्यवस्था को और भी मजबूत करेंगे।
देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, नैनीताल समेत सात शहरों का समावेश अमृत-1 योजना में किया गया है। इन योजनाओं का अमल शीघ्र ही धरातल पर दिखाई देगा। प्रदेश सरकार ने इस पहल के लिए भारत के शीर्ष विशेषज्ञ संस्थानों से सहयोग लिया है। कुल 98 महायोजनाएं विकास की दिशा में तैयार की जा रही हैं, जिसमें अमृत-1 के तहत 7, अमृत-2 में 23 और अन्य योजनाएं शामिल हैं।
अमृत-1 और अमृत-2 में शामिल शहरों की सूची
अमृत-1: देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, रुद्रपुर, काशीपुर, नैनीताल और हल्द्वानी।
अमृत-2: पौड़ी जनपद में कोटद्वार, श्रीनगर, पौड़ी; ऊधमसिह नगर जनपद में जसपुर, नगला, खटीमा, किच्छा, बाजपुर, सितारगंज, गदरपुर; नैनीताल में रामनगर; हरिद्वार में मंगलौर, लक्सर; चंपावत में टनकपुर; चमोली में गोपेश्वर; देहरादून में ऋषिकेश, डोईवाला, विकासनगर; अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, उत्तरकाशी और टिहरी।
जीआईएस आधारित मास्टर प्लान का महत्व
उत्तराखंड, देश का पहला राज्य है जो द्वितीय और तृतीय श्रेणी के निकायों के लिए भी जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) आधारित मास्टर प्लान तैयार कर रहा है। इस तकनीक के माध्यम से बेहतर भूमि उपयोग, अवैध निर्माण पर नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, ड्रेनेज योजना और आपदा प्रबंधन में मदद मिलेगी।
इन योजनाओं की विशेषताएं
नई महायोजनाओं की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता GIS आधारित प्लानिंग है। यह प्रक्रिया शहरों एवं आस-पास के क्षेत्रों का तकनीकी एवं समग्र आकलन करते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार विकास की योजना तैयार करती है। यहां पर विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में सुनियोजित विकास, पर्यटन को बढ़ावा, आर्थिक अवसरों का सृजन और पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखा जा रहा है।
सरकारी अधिकारियों का नजरिया
प्रदेश के आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा है कि यह महायोजनाएं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दृष्टिकोण के अनुसार तैयार की जा रही हैं। इनमें दीर्घकालिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर नियोजित विकास पर फोकस किया गया है। प्रत्येक कार्य को निर्धारित समयसीमा के अनुसार पूरा किया जाएगा।
शिक्षण संस्थानों की भागीदारी
महायोजनाओं के विकास में प्रदेश सरकार देश के विशेषज्ञ संस्थानों जैसे स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) नई दिल्ली, एसपीए भोपाल, एनआईटी कालीकट, एनआईटी सूरत और एमएनआईटी जयपुर की मदद ले रही है। यह विशेषज्ञता प्रदेश के सुनियोजित और दीर्घकालिक शहरी विकास में सहायक होगी।
मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाई जाने वाली ये तैयारियां न केवल ट्रैफिक जाम, अवैध निर्माण और अव्यवस्थित शहरीकरण से निपटने में सहायक होंगी, बल्कि स्थानीय जनता के लिए बेहतर सड़कें और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी प्रदान करेंगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, "यह महायोजनाएं प्रदेश के सुनियोजित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और आम जनता को बेहतर जीवन की सुविधाएं मुहैया कराएंगी।"
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