उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल: सरकार से वादों की अदायगी की मांग तेज

Mar 24, 2026 - 14:44
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उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल: सरकार से वादों की अदायगी की मांग तेज
उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल: सरकार से वादों की अदायगी की मांग तेज

उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल: सरकार से वादों की अदायगी की मांग तेज

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस आंदोलन में हिस्सा ले रहे अभियन्ताओं के कार्य बहिष्कार के चलते कई विकास कार्य प्रभावित होने की संभावना है।

टिहरी गढ़वाल। उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ, जो राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत अभियन्ताओं का एक प्रमुख संगठन है, ने शुक्रवार को अपनी लंबित एवं अधूरी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है। महासंघ के आह्वान पर, विभिन्न विभागों के इंजीनियर कार्य बहिष्कार कर आंदोलन में शामिल हो रहे हैं, जिससे कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

महासंघ की मांगें और सरकार की निष्क्रियता

महासंघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह हड़ताल कोई नया वित्तीय बोझ डालने की मांग के लिए नहीं, बल्कि पुराने समझौतों को लागू कराने की खातिर की जा रही है। लंबे समय से सरकार द्वारा किए गए आश्वासनों के बावजूद, जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

प्रमुख मांगें बनीं हड़ताल का कारण

अभियन्ताओं ने समान वेतनमान को अपनी प्रमुख मांग बताते हुए कहा कि वर्ष 2014 के बाद नियुक्त कनिष्ठ अभियन्ताओं के लिए 5400 ग्रेड पे देने की अपेक्षाएं की जा रही हैं, जबकि वर्तमान में ड्राफ्ट्समैन को केवल 4200 ग्रेड पे दिए जा रहे हैं। इसके अलावा, 4600 ग्रेड पे की विसंगतियों को खत्म करने की भी मांग उठाई गई है। महासंघ ने उरेडा विभाग में ग्रेड पे की अनियमितता का भी मुद्दा उठाया है।

विभागीय सुधारों की जरूरत

अभियन्ताओं ने विशेष रूप से कृषि विभाग में इंजीनियरिंग ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसके साथ ही, वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत अभियन्ताओं के लिए पदोन्नति के अवसर बढ़ाने के लिए “सेपरेट गैलरी” बनाने की भी मांग की गई है।

जल निगम और स्थानांतरण नीति पर ध्यान

महासंघ ने उत्तराखण्ड जल निगम और जल संस्थान के राजकीयकरण का भी मुद्दा उठाया है। इन संस्थाओं में कार्यरत अभियन्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की गई है। पर्वतीय क्षेत्रों जैसे बद्रीनाथ और केदारनाथ के लिए पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग भी उठाई गई है।

आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी

महासंघ के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। वे चेतावनी देते हैं कि इस हड़ताल के कारण विकास कार्यों में जो भी रुकावट आएगी, उसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

इस समय, प्रदेशभर में डिप्लोमा इंजीनियर्स के समर्थन में यह आंदोलन तेजी से बढ़ता जा रहा है और सरकार पर समाधान निकालने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

आज धरने में अभियन्ता अमित श्वसिया, शाखा अध्यक्ष इंजीनियर जयप्रकाश भट्ट, शाखा सचिव इंजीनियर आशीष मित्तल, जनपद सचिव राजेंद्र सोढी, प्रांतीय सचिव प्रोन्नत इंजीनियर सतीश भट्ट, मंडल उपाध्यक्ष ऊषा भंडारी, सहायक अभियंता शक्ति आर्य, नरेंद्र सिंह, अनिल कुमार, मोहन सिंह, इंजीनियर रेनू गुप्ता, इंजीनियर ममता पवार आदि ने हिस्सा लिया।

यह स्थिति चिंताजनक है और सरकार को इसे हल करने के लिए तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है। अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक करें।

Team Amrita Bazaar Patrika, राधिका शर्मा

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