‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी-02’: प्रवासी उत्तराखण्डियों के लिए जुड़ाव का मंच, संस्कृति के विकास में सरकार की सक्रियता

Feb 1, 2026 - 00:44
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‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी-02’: प्रवासी उत्तराखण्डियों के लिए जुड़ाव का मंच, संस्कृति के विकास में सरकार की सक्रियता
‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी-02’: प्रवासी उत्तराखण्डियों के लिए जुड़ाव का मंच, संस्कृति के विकास में सरकार की सक्रियता

‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी-02’: प्रवासी उत्तराखण्डियों के लिए जुड़ाव का मंच

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रोहिणी, दिल्ली में आयोजित ‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी सीजन–02’ में भाग लिया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखण्डीयों, लोक कलाकारों, युवाओं और महिलाओं ने हिस्सा लिया।

मुख्यमंत्री धामी ने लोक कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए उत्तराखण्ड की संस्कृति एवं परंपराओं को समर्पित इस महान आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों से लोक कलाकारों को एक मंच और पहचान मिलती है।

उत्तराखण्ड के सितारों को सम्मान

इस आयोजन में, मुख्यमंत्री ने सुप्रसिद्ध सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सौरभ जोशी, हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज गोरखेला और लोक गायिका कल्पना चौहान को ‘उत्तराखण्ड के सितारे’ सम्मान से नवाजा।

लोक संस्कृति का महत्व

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमें केवल कलाकारों को सम्मान नहीं देते, बल्कि समाज को सेवा और संस्कारों के प्रति जोड़ते हैं। उन्होंने उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति को जीवंत बताया, जिसमें गीत-संगीत, वेशभूषा और पारंपरिक परंपराएं शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, "यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बच्चों और युवाओं में अपनी बोली, संस्कृति और परंपराओं के प्रति गर्व की भावना विकसित करता है।" उन्होंने आगे कहा कि लोक नृत्य और लोकगीत राज्य की सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उत्तराखण्ड की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान

मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखण्ड को आस्था, तप, त्याग और साधना की भूमि बताते हुए इसे बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगा-यमुना और आदि कैलाश जैसे पवित्र स्थलों का घर बताया। उन्होंने कहा, "हमारी लोक संस्कृति हमारी जीवनशैली और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।" वे सरकार की मंशा को साझा करते हुए बोले कि राज्य सरकार संस्कृति को विकास से जोड़कर आगे बढ़ रही है।

संस्कृतिक और पर्यटन विकास की योजनाएं

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकास भी और विरासत भी” के मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का पुनर्विकास किया जा रहा है। इस संदर्भ में, केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। ये कार्य न केवल आस्था को मजबूत कर रहे हैं बल्कि स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उत्तराखण्ड देश के प्रमुख वेडिंग डेस्टिनेशन्स, एडवेंचर टूरिज्म और फिल्म शूटिंग के लिए उभर रहा है। विंटर टूरिज्म और होम-स्टे जैसी पहलों ने स्थानीय अर्थव्यवस्था में सुधार किया है।

महिला सशक्तिकरण की पहलों को बल

महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लखपति दीदी योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। 'एक जनपद-दो उत्पाद' योजना और 'हाउस ऑफ हिमालयाज' ब्रांड से राज्य के उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है।

प्रगति के समीकरण

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तराखण्ड ने सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हो रहा है। पलायन रोकने, किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को रोजगार देने में राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि सख्त कानूनों, पारदर्शी शासन और समान नागरिक संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में सुशासन स्थापित हुआ है।

अध्यक्षता के साथ, मुख्यमंत्री ने इस भावना को भी व्यक्त किया कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री द्वारा बताए गए “उत्तराखण्ड का दशक” को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

आखिरकार, ऐसी गतिविधियों से उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति को पुनर्जीवित किया जा रहा है और प्रवासी उत्तराखण्डियों को अपने मूल से जोड़ा जा रहा है।

फिर से संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने और विकास की दिशा में पहल करने का वादा करते हुए, मुख्यमंत्री धामी ने सभी उपस्थित लोगों को धन्यवाद दिया।

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सादर,

टीम अमृता बाजार पत्रिका, सुमन जोशी

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