उत्तराखण्ड में उद्घाटन: पहली रोबोटिक पूर्ण स्वचालित प्रयोगशाला की नई उपलब्धि

Feb 19, 2026 - 07:44
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उत्तराखण्ड में उद्घाटन: पहली रोबोटिक पूर्ण स्वचालित प्रयोगशाला की नई उपलब्धि
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखण्ड ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पहली रोबोटिक पूर्ण स्वचालित प्रयोगशाला का शुभारंभ किया है, जो मरीजों को तेज और सटीक जांच परिणाम प्रदान करेगा।

देहरादून। उत्तराखण्ड में श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज (SGRRIMHS) के जैव रसायन विभाग ने 18 फरवरी 2026 को राज्य की पहली रोबोटिक पूर्ण स्वचालित प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। यह प्रयोगशाला मरीजों को विश्वस्तरीय और प्रभावी चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने में सहायक होगी।

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में आयोजित इस उद्घाटन समारोह में एसजीआरआरआईएमएचएस के प्राचार्य, डॉ. उत्कर्ष शर्मा, और जैव रसायन विभाग के प्रमुख, डॉ. तारिक मसूद के साथ कई चिकित्सक और विशेषज्ञ उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान "सिक्स सिग्मा और पूर्ण प्रयोगशाला स्वचालन के लाभ" विषय पर एक निरंतर चिकित्सा शिक्षा सीएमई कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

उद्घाटन समारोह में श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के चेयरमैन, श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने डॉक्टरों और टीम को इस उपलब्धि पर बधाई दी। स्वागत भाषण के बाद, प्रमुख चिकित्सकों ने रिबन काटकर इस प्रयोगशाला का विधिवत शुभारंभ किया।

इस अवसर पर मेदांता अस्पताल की कंसल्टेंट बायोकैमिस्ट्री, डॉ. भावना बैस ने रोबोटिक टोटल लैब ऑटोमेशन के लाभों पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आधुनिक डायग्नोस्टिक्स में यह तकनीक न केवल कार्यक्षमता में सुधार करती है, बल्कि सटीकता और रिपोर्ट प्राप्ति के समय को भी कम करती है। इस प्रणाली के माध्यम से मरीजों को तेज और विश्वसनीय उपचार सुनिश्चित किया जाएगा।

इसके अलावा, डॉ. तारिक मसूद ने प्रयोगशाला चिकित्सा में सिक्स सिग्मा की भूमिका और उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के तरीकों पर चर्चा की। कार्यक्रम में हुए पैनल चर्चा और प्रश्नोत्तर सत्र में चिकित्सकों और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के बीच सार्थक बातचीत को प्रोत्साहित किया गया।

रोबोटिक प्रयोगशाला

विशेषज्ञों ने इस प्रयोगशाला को मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जो उच्च गुणवत्ता वाली जांच सुविधाएं मुहैया कराएगी। यह प्रणाली नमूनों की पूर्ण डिजिटल ट्रैकिंग, मानव त्रुटियों में कमी, तेज टर्नअराउंड समय और उच्च गुणवत्ता वाले नैदानिक परिणामों को सुनिश्चित करेगी। इससे गंभीर बीमारियों का समय पर और सही निदान संभव हो सकेगा, जो आईसीयू और आपातकालीन मरीजों के उपचार में तेजी लाएगा।

विशेषज्ञों ने आगे कहा कि सिक्स सिग्मा आधारित गुणवत्ता प्रणाली, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में मदद करेगी। इससे मरीजों को सुरक्षित और प्रभावी उपचार मिल सकेगा।

यह पहल उत्तराखण्ड में आधुनिक डायग्नोस्टिक सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी, जो मरीज देखभाल की गुणवत्ता को नई ऊँचाई तक पहुँचाएगी।

इस नई तकनीक की शुरुआत के साथ उत्तराखण्ड स्वास्थ्य सेवाओं में एक नया अध्याय जुड़ गया है, जो ना केवल स्थानीय बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण सेट करेगा।

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सादर,

टीम अमrita बज़ार पत्रिका, सुमन वर्मा

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