केला चिप्स: महिलाओं की सफलता की प्रेरणादायक कहानी

Oct 5, 2026 - 14:44
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केला चिप्स: महिलाओं की सफलता की प्रेरणादायक कहानी
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कम शब्दों में कहें तो, टिहरी गढ़वाल की महिलाओं ने ग्रामोत्थान-रीप परियोजना की मदद से केले के चिप्स बनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। उनकी मेहनत और सामूहिक प्रयासों के चलते आज यह महिलाएं केवल 100 रुपये की बचत से शुरू होकर हजारों की कमाई तक पहुँच गई हैं।

टिहरी गढ़वाल, 05 अक्टूबर, 2026। उत्तराखंड के कीर्तिनगर विकासखंड के ग्राम चौकी में स्थित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर एक नई रोजगार की राह खोली है। पहले जो महिलाएं छोटी बचत करने तक ही सीमित थीं, अब वे केले के चिप्स के उत्पादन, पैकेजिंग और बिक्री के माध्यम से अपने लिए आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त कर रही हैं।

महिलाओं की मेहनत से शुरू हुआ केला चिप्स का उद्यम

माणिकनाथ स्वायत्त सहकारिता के माध्यम से चालू की गई केला चिप्स निर्माण इकाई का शुभारंभ 22 फरवरी 2026 को ग्रामोत्थान-रीप परियोजना की सहायता से हुआ। यह प्रोजेक्ट लगभग 10 लाख रुपये की लागत से स्थापित किया गया था और इसमें आवश्यक मशीनरी भी उपलब्ध कराई गई। यहां 6 से 7 स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं सक्रिय रूप से शामिल हैं। प्रतिदिन करीब 6 से 7 महिलाएं इस इकाई में काम कर रही हैं, जिसमें उत्पादन, पैकेजिंग और अन्य कार्य शामिल हैं।

ग्रामोत्थान-रीप परियोजना का सहयोग

डीपीएम रीप, बी.के. भट्ट के अनुसार, इस इकाई के माध्यम से महिलाओं को गांव में ही रोजगार का अवसर मिला है। फरवरी से सितंबर 2026 के बीच, इस इकाई ने कुल 1,45,700 रुपये का कारोबार किया और लगभग 20,500 रुपये की शुद्ध बचत भी अर्जित की। पहले, समूह से जुड़ी महिलाएं केवल 100 रुपये तक की मासिक बचत करती थीं, लेकिन अब वे स्वरोजगार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ चुकी हैं।

समुदाय के लिए लिया गया कदम

समूह मोबिलाइजर प्रीति के मुताबिक, यह पहल करीब 400 से 500 महिलाओं को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें रोजगार के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। ग्रामोत्थान-रीप परियोजना के योगदान के साथ-साथ नई मशीनरी के लिए उन्होंने आधिकारिक संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।

स्थानीय सामग्री से बढ़ता कारोबार

चिप्स निर्माण के लिए आवश्यक कच्चा केला और सामग्री ग्रामीण महिलाओं से ही खरीदी जाती है। इससे न केवल उत्पादन इकाई का विकास हो रहा है बल्कि स्थानीय महिलाएं भी अपनी आय बढ़ा रही हैं। बाजार में मांग बढ़ने के साथ महिलाएं उत्पादन और बिक्री को बढ़ाने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही हैं।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

समूह से जुड़ी राखी और प्रीति ने कहा कि ग्रामोत्थान-रीप परियोजना से मिली मशीन और सहयोग ने उन्हें सिर्फ रोजगार का साधन ही नहीं दिया, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाया है। महिलाओं ने उत्तराखंड सरकार और जिला प्रशासन को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस सहयोग ने उन्हें गांव में ही अपने पैर पर खड़े होने का अवसर दिया है।

इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय संसाधनों और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा की जा सकती है। आज ग्राम चौकी की महिलाएं अपने उत्पादों को बाजार में पहुंचाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर एक सफल उद्यम का निर्माण करने में सफल हो रही हैं।

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शुभकामनाएं,
टीम अमृता बाजार पत्रिका

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