गढ़वाली फिल्म 'ढोली' को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में मिला रजत कमल

Jul 19, 2026 - 00:44
 137  501.8k
गढ़वाली फिल्म 'ढोली' को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में मिला रजत कमल
गढ़वाली फिल्म 'ढोली' को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में मिला रजत कमल

गढ़वाली फिल्म 'ढोली' को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में मिला रजत कमल

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Amrita Bazaar Patrika

कम शब्दों में कहें तो, गढ़वाली फिल्म 'ढोली' को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ गढ़वाली फिल्म के लिए रजत कमल से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर और लोकभाषा के प्रति अच्छा समर्पण दर्शाता है।

देहरादून। हाल ही में आयोजित हुए 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में गढ़वाली फिल्म 'ढोली', जिसे निर्देशक दिनेश पी. भोंसले ने बनाया है, ने एक नया इतिहास रच दिया है। इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ गढ़वाली फ़िल्म के रूप में प्रतिष्ठित रजत कमल पुरस्कार तथा ₹2 लाख की नकद राशि प्राप्त हुई है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर फिल्म की पूरी टीम को दिल से बधाई दी है।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 'ढोली' को मिले इस सम्मान से उत्तराखंड की समृद्ध लोकभाषा, लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत को मान्यता मिली है। यह पुरस्कार प्रदेश के फिल्म उद्योग के लिए प्रेरणादायक है और गढ़वाली सिनेमा को नई पहचान दिलाने में मदद करेगा। उन्होंने फिल्म के निर्माता एससी फार्माकेम प्राइवेट लिमिटेड, निर्देशक दिनेश पी. भोंसले और पूरी टीम को इस उपलब्धि के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि "उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं को देश-दुनिया में प्रभावी ढंग से पहुंचाने में क्षेत्रीय सिनेमा की महत्वपूर्ण भूमिका है।"

उत्तराखंड में फिल्म निर्माण का भविष्य

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार उत्तराखंड को एक फिल्म निर्माण के अनुकूल गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। नई फिल्म नीति के माध्यम से प्रदेश में फिल्म निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं के लिए नए अवसर और संभावनाएं खुल रही हैं।

फिल्म 'ढोली' का यह मान्यता प्राप्त करना सिर्फ फिल्म के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड राज्य के लिए भी गर्व की बात है। यह दर्शाता है कि स्थानीय सिनेमा विश्व स्तर पर पहचान बना रहा है एवं सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित रखने के लिए इसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

फिल्म की उपलब्धियों की समीक्षा

फिल्म 'ढोली' की कहानी और उसके संदेश ने दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई है। इसकी स्थानीय सेटिंग, भाषा और संस्कृति ने इसे और भी अनूठा बना दिया है। यह फिल्म गढ़वाली संस्कृति के महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर करती है, जिससे न केवल स्थानीय दर्शकों बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे सराहा गया है।

फिल्म अवार्ड्स और भारतीय सिनेमा

विभिन्न पुरस्कार समारोहों में गढ़वाली फिल्म को मिली सफलता यह साबित करता है कि भारतीय सिनेमा अब केवल बड़े शहरों और आम सिनेमा तक सीमित नहीं रह गया है। क्षेत्रीय भाषाओं में बनी फिल्में भी अब राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर पहचान बना रही हैं, जो कि एक सकारात्मक संकेत है।

इस उपलब्धि के साथ ही, 'ढोली' फिल्म ने गढ़वाली सिनेमा की महत्वपूर्ण विकास यात्रा को एक नया मोड़ दिया है, और इसे संभवतः देश-विदेश में फिल्म प्रेमियों के बीच लाने का एक अवसर भी प्रदान किया है।

अधिक जानकारी के लिए [यहाँ](https://amritabazaarpatrika.com) क्लिक करें।

सादर,
टीम अम Rita Bazaar Patrika

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0