टिहरी बांध प्रभावित भलड़गांव के ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना जारी, झील के जलस्तर में वृद्धि से बढ़ा खतरा
टिहरी बांध प्रभावित भलड़गांव के ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना जारी, झील के जलस्तर में वृद्धि से बढ़ा खतरा
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कम शब्दों में कहें तो, भलड़गांव के ग्रामीणों ने अपनी विस्थापन और पुनर्वास की मांग के लिए 15 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन धरने को ख़त्म करने का कोई इरादा नहीं दिखाया है।
भलड़गांव के ग्रामीणों की मांगें और संघर्ष
टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित ग्राम सभा भलड़गांव के ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पिछले 15 दिनों से, ये ग्रामीण टिहरी झील के किनारे पहाड़ी पर अनिश्चितकालीन धरने पर डटे हुए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक पुनर्वास विभाग और प्रशासन उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक यह धरना जारी रहेगा। ग्रामीणों के अनुसार, पुनर्वास का मुद्दा उनके जीवन और भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जल, जंगल और जमीन के दुरुपयोग का आरोप
धरने पर बैठे ग्रामीणों का कहना है कि टिहरी बांध परियोजना के कारण उनकी जल, जंगल और जमीन, सब कुछ डूब गई है। इसके बावजूद, वर्षों बीत जाने के बाद भी पुनर्वास विभाग की ओर से कोई सकारात्मक कदम उठाए नहीं गए हैं। उनका आरोप है कि पुनर्वास विभाग की लापरवाही के कारण उन्हें अपने हक के लिए लंबे समय से संघर्ष करना पड़ रहा है। उनके लिए यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक मुद्दा बन गया है।
झील का बढ़ता जलस्तर और खतरे की घंटी
जिस पहाड़ी पर ग्रामीण धरना दे रहे हैं, वहां टिहरी झील का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। जानकारी के अनुसार, आगामी दो से तीन दिनों में झील का पानी उनके धरना स्थल तक पहुंच सकता है, जिससे उनकी सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा है। बरसात के मौसम में जलस्तर की वृद्धि के कारण स्थिति और भी गंभीर हो गई है। ग्रामीणों को इस खतरे के बीच अपनी आवाज उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
डीएम की अपील और ग्रामीणों का दृढ़ संकल्प
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी नीतिका खंडेलवाल ने ग्रामीणों से धरना समाप्त करने की अपील की है। लेकिन ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पुनर्वास विभाग उनकी मांगों पर एक लिखित आश्वासन नहीं देता और विस्थापन की प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तब तक वे धरना स्थल से पीछे नहीं हटेंगे। उनका यह कदम प्रशासन के लिए एक चुनौती बना हुआ है।
ग्रामीणों के संघर्ष का महत्त्व
भलड़गांव के ग्रामीणों के इस आंदोलन ने राज्य और केंद्र सरकार के ध्यान को आकर्षित किया है। यह सिर्फ एक स्थान की समस्या नहीं है, बल्कि यह विस्थापन, पुनर्वास और मानवाधिकार के मुद्दों से जुड़ा एक गहरा समाजिक प्रश्न है। ग्रामीणों का संघर्ष न केवल उनके हक की लड़ाई है, बल्कि यह अन्य प्रभावित समुदायों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।
संक्षेप में
भलड़गांव के ग्रामीणों का आंदोलन न केवल टिहरी बांध परियोजना के पहले से प्रभावित समुदाय के लिए बल्कि पूरे राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है। उनकी मांगें केवल उनके हक के लिए नहीं, बल्कि अन्य प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी एक महत्वपूर्ण आवाज को दर्शाती हैं।
प्रदेश के विकास के लिए जरूरी है कि प्रशासन इन मांगों को गंभीरता से ले। स्थानीय समुदाय की सहभागिता से ही विकास की योजनाएँ सफल हो सकती हैं। जब प्रशासन इस प्रकार की मांगों का समाधान करेगा, तो न केवल ग्रामीणों के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए यह एक सकारात्मक कदम साबित होगा।
स्रोतों के अनुसार, ग्रामीणों का आंदोलन आने वाले दिनों में और भी तेज हो सकता है अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। यह मुद्दा केवल भलड़गांव के लिए नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण बन सकता है।
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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका
सुषमा शर्मा
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