दून के फूलदेई 2026 समारोह का भव्य समापन: बच्चों की प्रतिभा का बेजोड़ प्रदर्शन
दून में फूलदेई 2026 का रंगारंग समापन
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कम शब्दों में कहें तो, फूलदेई 2026 कार्यक्रम का रंगारंग समापन हुआ, जिसमें प्रदेश के श्रेष्ठ सौ बच्चों को पुरस्कृत किया गया।
देहरादून: 15 मार्च से 15 अप्रैल तक चले अद्भुत फूलदेई 2026 अभियान का भव्य समापन समारोह हाल ही में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम ने बच्चों के लिए रचनात्मकता का एक खुला मंच प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विशेष रूप से, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय लाल तप्पड़, गलज्वाड़ी और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज अजबपुर के बच्चों ने अपनी कला से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अभियान की सफलताएँ
कोना कक्षा की संयोजक, आशा डोभाल, ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस यात्रा में अब तक 930 कोनों की स्थापना हो चुकी है। उन्होंने आगे बताया कि फूलदेई 2026 का आगाज 15 मार्च को 'धूमधाम के साथ छमा देई देणी दु्वार भरभकार' की धुन पर किया गया, जिसमें अनेक विद्यालयों के बच्चों ने भाग लिया। इस आयोजन में 100 से ज्यादा छात्रों ने चित्रकला प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
दून बुक फेस्ट परेड ग्राउंड में, NBT के सहयोग से स्वनात्मक कार्यशाला (फुलारी) का आयोजन किया गया। यहाँ सरकारी और गैरसरकारी विद्यालयों के छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम में सर्वश्रेष्ठ तीन प्रविष्टियों को पुरस्कृत किया गया। उत्तराखंड के विभिन्न विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ फूलदेई का पर्व उत्साह के साथ मनाया गया।
इसी संधर्भ में, विभिन्न विद्यालयों के छात्रों के साथ श्रीमती शांति बिजोला एवं श्रीमती बीना कंडारी द्वारा 'भाषा बचाओ' शीर्षक से ऑनलाइन गढ़वाली भाषा वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस अभियान का समापन फील गुड ट्रस्ट के सहयोग से सेड़िया खाल, पौड़ी गढ़वाल में आधिकारिक रूप से किया गया।
बच्चों की सहभागिता और पुरस्कृत प्रविष्टियाँ
इस वर्ष के लिए, फूलदेई कार्यक्रम में 10,000 बच्चों की सहभागिता का लक्षय रखा गया था। इसके लिए 300 से अधिक विद्यालयों में ड्राइंग शीट्स भेजी गई और बच्चों को कला, निबंध, कहानी और कविता लेखन के लिए प्रेरित किया गया। अंततः, कोना कक्षा के संयोजकों गणेश उनियाल और आशा डोभाल द्वारा 100 श्रेष्ठ प्रविष्टियों की घोषणा की गई।
विजेताओं की घोषणा और उनके विचार
भाषा बचाओ अभियान के विजेताओं की घोषणा शांति बिजोला और बीना कंडारी द्वारा की गई, जिसमें आठ बच्चों को पुरस्कृत किया गया। धाद ने इस बार जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट उपलब्धि वाले दस बच्चों को भी सम्मानित किया। इस अवसर पर कोना सहयोगियों जैसे बीरेंद्र गुसांईं, रितेश जोशी, श्याम कुमार आनंद, हिमांशु अवस्थी, और सरोज नौटियाल ने अपने विचार साझा किए। इसके अलावा, शिक्षकों प्रीती तोमर, ज्योति जोशी, भावना नैथानी ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन मीनाक्षी जुयाल ने किया।
अंत में, इस सफल आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब बच्चों की प्रतिभाओं को एक मंच दिया जाता है, तो वे अपने अद्वितीय रंगों में चमकते हैं। इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल बच्चों की मानसिकता को विकसित करते हैं बल्कि उन्हें समाज में योगदान देने की प्रेरणा भी देते हैं।
इस अवसर को ध्यान में रखते हुए, हम सभी बच्चों, शिक्षकों और आयोजकों का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।
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टीम अमृता बाजार पत्रिका - सुषमिता शर्मा
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