दून में बिहार से लाए गए बच्चों का मदरसों में मामला तेजी से बढ़ रहा है

Apr 17, 2026 - 07:44
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दून में बिहार से लाए गए बच्चों का मदरसों में मामला तेजी से बढ़ रहा है
दून में बिहार से लाए गए बच्चों का मदरसों में मामला तेजी से बढ़ रहा है

दून में बिहार से लाए गए बच्चों का मदरसों में मामला तेजी से बढ़ रहा है

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून के मदरसों में बिहार से लाए गए बच्चों के मामले ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है। शासन ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए वेरिफिकेशन अभियान शुरू किया है।

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो ने इस विवाद को और भी तूल दे दिया है। वीडियो में यह संकेत मिलता है कि उत्तराखंड के मदरसों में बाहरी राज्यों के बच्चों को लाया गया है। इससे सरकारी शासन द्वारा तुरंत निषेधात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री की प्राथमिकता: बच्चों की सुरक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि बच्चों की सुरक्षा, पारदर्शिता और नियमों का पालन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सुनिश्चित किया कि अगर किसी भी प्रकार की अनियमितताएं पाई गईं, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सत्यापन अभियान शुरू

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे व्यापक सत्यापन अभियान चलाएं। इस अभियान में बच्चों के आने का स्रोत, अभिभावकों की सहमति और उन्हें लाने वाले व्यक्तियों की भूमिका को लेकर गहन जांच की जाएगी। इसके लिए सभी मदरसों में सघन निरीक्षण किया जाएगा।

Madrasas in Dehradun

मदरसे और उनकी संख्या

उत्तराखंड में वर्तमान में 452 पंजीकृत मदरसे संचालित हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में लागू होने वाले उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत, 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड समाप्त हो जाएगा। इसके बाद सभी मदरसों को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से संबद्धता प्राप्त करनी होगी और मान्यता के लिए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से स्वीकृति लेनी होगी।

इस पूरे मामले पर प्रदेश भर में बढ़ती चिंताओं के बीच, यह अत्यंत आवश्यक है कि सभी संबंधित पक्ष अपने उत्तरदायित्व को सही-सही निभाएं। शिक्षा के स्तर को उठाना और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल एक नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक सामाजिक आवश्यकता भी है।

बिहार से लाए गए इन बच्चों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर दृष्टि डालते हुए, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि इन बच्चों के अधिकार तथा सुरक्षा सर्वोपरि हैं। यह हमें इस बात की याद दिलाता है कि शिक्षा केवल ज्ञान का हस्तांतरण नहीं है, बल्कि यह एक नैतिक जिम्मेदारी भी है।

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Team Amrita Bazaar Patrika

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