देवप्रयाग में आपदा प्रबंधन पर जागरूकता कार्यशाला: राहत, बचाव और सीपीआर का महत्वपूर्ण प्रशिक्षण
देवप्रयाग में आपदा प्रबंधन पर जागरूकता कार्यशाला
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कम शब्दों में कहें तो, देवप्रयाग में प्राकृतिक आपदाओं के प्रति जागरूकता के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें नागरिकों को सुरक्षा, राहत व बचाव कार्यों की जानकारी दी गई।
टिहरी गढ़वाल, 08 जुलाई। जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, टिहरी गढ़वाल के द्वारा बुधवार को देवप्रयाग तहसील सभागार में एक दिवसीय आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के प्रति जनजागृति फैलाना और राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करना था।
कार्यक्रम का उद्देश्य और सहभागिता
इस कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों तथा तहसील कर्मियों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को क्षेत्र में संभावित प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़ तथा landslides के बारे में जानकारी दी। उन्होंने आपदा से पहले की तैयारी, आपदा के समय क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए और आपदा के बाद क्या कदम उठाने चाहिए, इस पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु
प्रतिभागियों को प्राथमिक उपचार, कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर), तथा बेसिक राहत एवं बचाव उपकरणों के उपयोग की महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान کی गईं। इसके अलावा, आपातकालीन परिस्थितियों में क्या करें और क्या न करें, इस विषय पर भी सलाह दी गई।
जनपद आपातकालीन परिचालन केंद्र और विभिन्न टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी साझा की गई। इसके साथ ही, सुरक्षित स्थानों और निकासी मार्गों की भी जानकारी दी गई, जिससे लोग आपदाओं के समय में अधिक सुरक्षित रह सकें।
‘भू-देव’ एप की उपयोगिता
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को ‘भू-देव’ एप की उपयोगिता के बारे में भी अवगत कराया गया। यह एप आपदा के समय में प्रभावी उपयोग के लिए विकसित किया गया है, जिससे लोग तत्काल जानकारी प्राप्त कर सकें और राहत कार्यों में तेजी ला सकें।
विशेषज्ञों की बातें
इस कार्यशाला में कुल 35 प्रतिभागियों एवं तहसील कर्मियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में तहसीलदार विजयपाल सिंह गुसाईं और आर.के. मनोहर नेगी ने संबोधन करते हुए कहा कि आपदा प्रManagement में जनसहभागिता बहुत आवश्यक है। उन्होंने समय पर सतर्कता बरतने और सामुदायिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
निष्कर्ष
इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल नागरिकों को प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित जानकारियाँ प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें आत्म-रक्षा और सामुदायिक सहयोग के लिए भी प्रेरित करते हैं। ऐसे प्रयास भविष्य में अत्यधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं, खासकर जब हम अनियोजित जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के साक्षी बनते हैं।
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Team Amrita Bazaar Patrika
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