पूर्व सीएम के निजी सहायक के ठिकाने से 1.28 करोड़ की संपत्ति की जब्ती: राजनैतिक हलचल
पूर्व सीएम के निजी सहायक के ठिकाने से 1.28 करोड़ की संपत्ति की जब्ती: राजनैतिक हलचल
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कम शब्दों में कहें तो: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के निजी सहायक चंदन सिंह जीना के ठिकाने से 1.28 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है। यह संपत्ति यूकेएसएसएससी वीपीडीओ भर्ती अनियमितता से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की छापेमारी के दौरान मिली।
देहरादून: उत्तराखंड में एक बार फिर से भर्ती घोटाला सुर्खियों में है। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के तत्कालीन निजी सहायक चंदन सिंह जीना के आवास पर छापेमारी के दौरान 1.28 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। इसमें से 32 लाख रुपये नकद, 200.5 ग्राम सोना, 12 लग्जरी घड़ियां और अन्य बेशकीमती सामान शामिल हैं।
ईडी की कार्रवाई और राजनैतिक प्रतिक्रियाएँ
10 सितंबर को हुई छापेमारी से राजनैतिक हलचले पैदा हो गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह छापेमारी पिछले कुछ वर्षों में हुई कई घोटालों की कड़ी में एक नया अध्याय है।
ईडी ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धाराओं के तहत की है। जांच में सामने आया है कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (वीपीडीओ) परीक्षा-2016 में अनियमितताओं का मामला है। उन अनियमितताओं के कारण लाखों रुपये की अवैध संपत्ति जमा की गई।
चंदन सिंह जीना का संदिग्ध रुतबा
जीना, जो 2014 से 2017 तक रावत के कार्यकाल के दौरान विशेष कार्याधिकारी (OSD) भी रहे, पर यह आरोप है कि उन्होंने यूकेएसएसएससी के सुरक्षित अभिरक्षा से ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं में भी हेरफेर किया। मामले की जांच में जीना के आवास से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।
जब्त की गई सम्पत्ति की जानकारी
जाँच के दौरान जीना के आवास से 32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकद, 200.5 ग्राम सोना (13 सोने के सिक्के और सात चेन), और लग्जरी ब्रांड्स की 12 घड़ियां जैसे रोलेक्स, राडो, और कैसियो एडिफिस बरामद किए गए। इसके अलावा, जीना और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में कुल 52.16 लाख रुपये की राशि को फ्रीज कर दिया गया है। यह संपत्ति ईडी द्वारा जब्त की गई और इसकी कुल मूल्यांकन राशि लगभग 1.28 करोड़ रुपये आंकी गई है।
अधिकारी और आरोपियों की सूची
इस मामले में पहले ही कई प्रमुख अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिसमें:
- डॉ. आरबीएस रावत (पूर्व अध्यक्ष, यूकेएसएसएससी)
- मनोहर सिंह कन्याल (पूर्व सचिव)
- राजेंद्र सिंह पोखरिया (पूर्व परीक्षा नियंत्रक)
इनके अलावा, कई अन्य दोषियों की गिरफ्तारी भी की गई है, जो सीधे तौर पर इस घोटाले में शामिल थे।
आगे की जांच
जांच के दौरान यह निष्कर्ष निकाला गया कि परीक्षा की ओएमआर सीटों में हेरफेर की गई थी और इसके लिए निजी कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों के साथ मिलकर काम किया गया। मामले की जांच जारी है और ईडी ने कहा है कि वे इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतेंगे।
ईडी के प्रवक्ता ने बताया कि ऐसी घटनाएं यथाशीघ्र समाप्त करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। जांच में यदि कोई भी और बड़े नाम सामने आएंगे, तो उन पर भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक दलों के लिए यह एक बड़ा झटका है और कांग्रेस ने इस मामले में सरकार पर कई सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही, इस घोटाले की चर्चा समाज के हर वर्ग में होने लगी है।
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यह घटनाक्रम हमें यह सिखाता है कि सरकारी कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए, ताकि आम जनता का विश्वास बना रहे।
Team Amrita Bazaar Patrika - सीमा शर्मा
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