प्रख्यात पुरातत्वविद प्रो. बीआर मणि ने छात्रों के साथ किया संवाद, पुरातत्व में करियर की संभावनाएं समझाईं
प्रख्यात पुरातत्वविद प्रो. बीआर मणि का छात्रों से संवाद
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कम शब्दों में कहें तो, प्रो. बीआर मणि ने मानव भारती स्कूल में छात्रों से बातचीत के दौरान पुरातत्व में करियर की संभावनाओं पर की चर्चा।
देहरादून। मानव भारती स्कूल में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित एवं आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक प्रो. (डॉ.) बीआर मणि ने छात्र-छात्राओं से संवाद किया। इस सत्र में उन्होंने पुरातत्व के क्षेत्र में करियर बनाने, शोध की चुनौतियों और प्राचीन भारतीय इतिहास के अनछुए पहलुओं पर चर्चा की।
पुरातत्व में करियर की संभावनाएं
प्रो. मणि ने छात्रों से कहा कि, "पुरातत्व में करियर के अवसर वृहद तो हैं, लेकिन अन्य पारंपरिक क्षेत्रों जैसे मेडिकल या इंजीनियरिंग के मुकाबले कम हैं। यह उन युवाओं के लिए समृद्ध क्षेत्र है, जो इतिहास और शोध के प्रति गहरे समर्पण का भाव रखते हैं।" उन्होंने बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) में अवसर हैं, जहां संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के माध्यम से ग्रुप-A और ग्रुप-B स्तर के क्लास-वन गजटेड पदों पर करियर के अवसर उपलब्ध हैं।
प्रो. मणि का अनुभव एवं ज्ञान
प्रो. मणि ने विद्यार्थियों को बताया कि पुरातत्व एक बहुविषयक विज्ञान है और उच्च शिक्षा (MA और PhD) के बाद विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई के व्यापक अवसर हैं। इसके अलावा, उन्होंने पैलियोन्टोलॉजी (जीवाश्म विज्ञान) में करियर बनाने की बात भी कही। ऐसे छात्र जो प्राचीन लिपियों और पांडुलिपियों के विद्वेषी होना चाहते हैं, वे पुरालेखशास्त्र (एपिग्राफी) के क्षेत्र में भी विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं।
गुप्त वंश की अनमोल खोज
छात्रों से बातचीत के दौरान प्रो. मणि ने गुप्त वंश के संस्थापक महाराजा श्रीगुप्त के दुर्लभ अभिलेख के ऐतिहासिक महत्व को भी उजागर किया। उन्होंने कहा, "गुप्त काल भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण युग' माना जाता है, जहां साहित्य, कला और स्थापत्य का अद्वितीय विकास हुआ।" उनके अनुसार, यह अभिलेख न सिर्फ गुप्त शासकों की ऐतिहासिकता को प्रमाणित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि उनका प्रभाव क्षेत्र बनारस और सारनाथ के आसपास तक फैला हुआ था।
वैज्ञानिक उत्खनन और प्राचीन भारतीय आर्थिक इतिहास
कार्यक्रम में प्रो. मणि ने अपने अन्य प्रमुख कार्यों की चर्चा करते हुए बताया कि वर्ष 2003 में अयोध्या स्थल का वैज्ञानिक उत्खनन किया गया था, जिसे न्यायालय ने स्वीकार किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने ऋग्वैदिक काल में प्रचलित स्वर्ण मुद्रा 'निष्क' के मानकीकरण पर भी विद्यार्थियों को जानकारी प्रदान की।
संस्कृति और इतिहास की ओर प्रेरणा
कार्यक्रम के अंत में प्रो. मणि ने छात्रों के द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को सराहा और उन्हें अपने इतिहास एवं संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा दी। मानव भारती स्कूल के निदेशक डॉ. हिमांशु शेखर ने इस कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
इस संवाद ने छात्रों को पुरातत्व के क्षेत्र में न केवल करियर की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी, बल्कि उन्हें अपने इतिहास और संस्कृति से जुड़ने के लिए भी प्रेरित किया।
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टीम अमृता बाजार पत्रिका, सुमन कौर
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