बालिका दिवस पर मेधावी बालिकाओं को मिला सम्मान
बालिका दिवस पर मेधावी बालिकाओं को मिला सम्मान
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर पंचायतों की मेधावी बालिकाओं को उत्सव के रूप में सम्मानित किया गया है। यह कार्यक्रम बाल अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उजागर करने के लिए आयोजित किया गया था।
देहरादून: अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर, उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली बालिकाओं को सम्मानित किया। इस समारोह में बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से बाल अधिकारों पर दो नई पुस्तिकाओं का विमोचन किया गया। यह कार्यक्रम उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से चुनी गई मेधावी बालिकाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच था, जहां उनकी प्रतिभा और उपलब्धियों को मान्यता दी गई।
कार्यक्रम का संचालन और प्रमुख विचार
इस विशेष कार्यक्रम की अध्यक्षता आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने की, जो बालिकाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के महत्व पर जोर देती हैं। उन्होंने कहा कि "बालिकाओं को एक ऐसा सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण प्रदान करना आवश्यक है, जहां वे अपनी प्रतिभा का विकास कर सकें।" इस केंद्रित दृष्टिकोण ने यह दर्शाया कि बच्चों की शिक्षा और सशक्तीकरण के लिए निरंतर प्रयास करने की जरूरत है।
आयोग के सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने भी बालिकाओं के सर्वांगीण विकास पर जोर देते हुए बताया कि यह उनके अधिकारों की सुरक्षा और समान अवसर प्रदान करने की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षा और सामाजिक भागीदारी को बालिकाओं के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान बताया।
विशिष्ट बालिकाओं का सम्मान
कार्यक्रम में उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से आई बालिकाओं को जिनके प्रदर्शन ने उन्हें इस सम्मान के योग्य बनाया था, ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसमें पंचम बाल विधानसभा-2026 में चयनित बाल विधायकों ने विशेष भागीदारी की। यह एक सकारात्मक संकेत है कि युवा पीढ़ी सामाजिक और राजनीतिक मामलों में सक्रियता से भाग ले रही है।
पुस्तिकाओं का विमोचन और उनके महत्व
इस अवसर पर "हैंडबुक ऑन चाइल्ड राइट्स फॉर स्टेकहोल्डर्स" और "हैंडबुक ऑन चाइल्ड राइट्स फॉर चिल्ड्रन" पुस्तिकाओं का विमोचन हुआ। इन पुस्तिकाओं का उद्देश्य बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को उनके अधिकारों और संरक्षण के संबंध में जानकारी प्रदान करना है। यह पहल बच्चों के अधिकारों के महत्व को समझाती है और उनके संरक्षण की दिशा में सहायक होगी।
कार्यक्रम के अन्य प्रमुख सहभागी
इस कार्यक्रम में राज्य मंत्री मधु भट्ट, अल्मोड़ा के मेयर अजय वर्मा, आयोग के अन्य सदस्य और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। आयोग के सदस्य दयाल सिंह बिष्ट और बबीता सहोत्रा ने भी बालिकाओं की सुरक्षा और शिक्षा पर विचार साझा किए। यह सभी वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना करते हुए बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक जिम्मेदारी को रेखांकित करते हैं।
समापन विचार
कार्यक्रम का अंत डॉ. सतीश कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, अधिकारियों और प्रतिभागियों को सम्मानित किया। यह आयोजन न केवल बालिकाओं की उपलब्धियों को मान्यता देता है, बल्कि यह समाज को यह संदेश भी देता है कि हमें उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
इसके माध्यम से, हमें यह याद रखना चाहिए कि बालिकाओं को बराबरी के अवसर और सुरक्षित वातावरण देना हमारी जिम्मेदारी है। इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में जागरूकता और परिवर्तन लाने में मदद करते हैं।
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सादर,
टीम अम Rita Bazaar Patrika
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