बेटियां सृष्टि का आधार, दृष्टि पवित्र होगी तो बदलेगी सृष्टि: डॉ. दुर्गेश आचार्य की प्रेरक वाणी

Sep 21, 2026 - 00:44
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बेटियां सृष्टि का आधार, दृष्टि पवित्र होगी तो बदलेगी सृष्टि: डॉ. दुर्गेश आचार्य की प्रेरक वाणी

बेटियां सृष्टि का आधार, दृष्टि पवित्र होगी तो बदलेगी सृष्टि: डॉ. दुर्गेश आचार्य की प्रेरक वाणी

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कम शब्दों में कहें तो, डॉ. दुर्गेश आचार्य ने टिहरी गढ़वाल में चल रही शिव महापुराण कथा में बेटियों के महत्व और उनकी भूमिका को उजागर किया। उन्होंने कहा कि बेटियां न केवल परिवार का आधार हैं, बल्कि वे सृष्टि का आधार भी हैं।

मां पार्वती की विदाई का भावुक प्रसंग

टिहरी गढ़वाल के बौराड़ी शहीद स्मारक में चल रही शिव महापुराण कथा के सातवें दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह सम्पन्न होने के बाद माता पार्वती की विदाई का माहौल अत्यंत भावुककारी था। कथा का यह दिन श्रद्धालुओं के लिए विशेष बना रहा। पहले दिन जहां शिव बारात का आगमन और विवाह का प्रसंग सुनाया गया था, वहीं आज पार्वती की विदाई ने सभी को भावुक कर दिया।

कथा व्यास डॉ. दुर्गेश आचार्य जी महाराज ने माता मैना द्वारा पार्वती को ससुराल की जिम्मेदारियों और गृहस्थ जीवन की सीख देने के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि माता ने बेटी को पति की सेवा, परिवार के प्रति प्रेम, और दायित्वों के निष्ठापूर्वक निर्वहन का मार्गदर्शन दिया। यह सुनकर समाज के विभिन्न वर्गों के श्रद्धालु गदगद हो उठे।

भगवान कार्तिकेय और गणेश जी का प्रसंग

कथा के दौरान, डॉ. आचार्य ने भगवान कार्तिकेय की जन्म कथा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि तारकासुर के आतंक के कारण देवता चिंतित थे, और उनका वध केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही संभव था। इसके साथ ही भगवान गणेश की बाल जन्म कथा का भी वर्णन हुआ।

कथा के माध्यम से आचार्य जी ने धर्म, भक्ति, और सदाचार का महत्व बताते हुए यह कहा कि साधु-संत ही शिव और शक्ति के असली स्वरूप का अहसास कराते हैं।

बेटियों को सम्मान और शिक्षा देने की आवश्यकता

डॉ. आचार्य ने बेटियों को शिक्षा और सम्मान देने का आह्वान करते हुए कहा, "अगर बेटियां नहीं होंगी, तो सृष्टि का संचालन कैसे होगा?" वे चाहते हैं कि सभी माता-पिता अपनी बेटियों को संस्कार और शिक्षा देकर उन्हें सशक्त बनाएं। जब बेटियाँ सशक्त होंगी, तब समाज और परिवार में सकारात्मक बदलाव होंगे।

कथा के दौरान, डॉ. आचार्य ने श्रद्धालुओं को कथा सुनने का महत्व समझाते हुए कहा कि ध्यान कथा में होना ज़रूरी है। केवल शारीरिक उपस्थिति कथा स्थल पर होना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि दृष्टि ही सृष्टि का निर्माण करती है, इसलिए हमें अपनी दृष्टि को पवित्र रखने की आवश्यकता है।

विशिष्ट अतिथियों का आशीर्वाद

कथा में जिला पंचायत उपाध्यक्ष मान सिंह रौतेला, कांग्रेस शहर अध्यक्ष कुलदीप पंवार, और वरिष्ठ पत्रकार गोविंद बिष्ट जैसे लोगों ने व्यास पीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष राकेश राणा, कोषाध्यक्ष महावीर प्रसाद उनियाल, और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कथा कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया।

शिव महापुराण कथा ने सभी श्रद्धालुओं को न केवल भक्ति में लीन किया, बल्कि उन्हें शिक्षित भी किया। इस प्रकार के आयोजनों से हमें अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को समझने तथा अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने की प्रेरणा मिलती है।

बेटियों के सम्मान और उनके महत्व को समझना आज समाज की आवश्यकता है। हमें मिलकर एक ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए जहाँ बेटियां न केवल सुरक्षित हों, बल्कि उन्हें अपने अधिकारों और अवसरों का पूरा उपयोग करने की भी पूरी स्वतंत्रता हो।

इस कथा के माध्यम से हमें यह समझ में आया कि बेटियां सच में सृष्टि का आधार हैं और उनकी दृष्टि जितनी पवित्र होगी, उतनी ही सृष्टि में परिवर्तन देखने को मिलेगा।

इसके अलावा, सभी श्रद्धालुओं के लिए यह कथा एक प्रेरणा बन गई है, जो हमें आगे बढ़कर बेटियों को सशक्त बनाने के लिए प्रेरित करती है।

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टीम अमृता बाजार पत्रिका

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