भर्ती घोटालों पर भाजपा का प्रचार शर्मनाक: युवाओं को चाहिए जवाबदारी
भर्ती घोटालों पर भाजपा का प्रचार शर्मनाक: युवाओं को चाहिए जवाबदारी
Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Amrita Bazaar Patrika
कम शब्दों में कहें तो, भाजपा द्वारा भर्ती घोटालों पर फैलाए गए दुष्प्रचार ने लाखों बेरोजगार युवाओं के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। कांग्रेस पार्टी ने भाजपा के राष्ट्रीय आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय पर तीखा हमला किया है।
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में शोरगुल मच गया है जब अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर भर्ती घोटालों को लेकर कुछ विवादास्पद बयान दिए। कांग्रेस प्रवक्ता सुजाता पॉल का कहना है कि ये बयान केवल राजनीतिक ढोंग हैं, जो कि भाजपा की असल विफलताओं से ध्यान भटकाने का प्रयास है।
कांग्रेस ने भाजपा से मांग की है कि अमित मालवीय को युवाओं से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि उनके बयान को सुनकर साफ दिखता है कि भाजपा अपने कार्यकाल के दौरान उठे भर्ती घोटालों की जिम्मेदारी लेने में असफल रही है। राहुल गांधी के देहरादून आगमन ने भाजपा की नींद उड़ा दी है, क्योंकि छात्रों में उठ रही आवाज ने उनकी चिंताएँ और बढ़ा दी हैं।
भर्ती घोटाले की गंभीरता
भर्ती घोटाला, जो कि 2022 में उत्तराखंड के UKSSSC द्वारा सामने आया, हजारों युवाओं के सपनों को तोड़ने का काम करता है। यह साबित करता है कि भर्ती माफिया राज्य में व्यवस्थित रूप से सक्रिय था। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यदि भाजपा यह दावा करती है कि उन्होंने व्यवस्था को पारदर्शी बनाया है, तो इतनी बड़ी अनियमितता कैसे हुए?
भाजपा की यह दलील कि उन्होंने सब कुछ सुधार लिया, सच्चाई से कोसों दूर है। अनेक भर्ती परीक्षाएँ बार-बार रद्द होती रहीं, जिससे हजारों अभ्यर्थियों को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक कष्ट झेलने पड़े। ऐसे में, भाजपा का यह आत्मविश्वास किसी भी गंभीरता से दूर है।
युवाओं का सवाल
कांग्रेस ने भाजपा से स्पष्ट सवाल पूछा है कि:
- भर्ती घोटाला 2022 में भाजपा सरकार में क्यों हुआ?
- भर्ती माफिया लंबे समय तक किसके संरक्षण में सक्रिय रहे?
- बार-बार परीक्षाएँ रद्द होने की जिम्मेदारी कौन लेगा?
भाजपा यह भी बताए कि भर्ती घोटालों के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवाओं का उत्पीड़न क्यों हुआ? क्या सरकार का दायित्व नहीं है कि वह युवाओं का विश्वास जीते, न कि उनकी आवाज दबा दे?
राजनीतिक दृष्टिकोण
भाजपा द्वारा इस मुद्दे को कांग्रेस बनाम भाजपा में बदलने का प्रयास निंदनीय है। यह एक गंभीर विषय है जो उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है। समाचार में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की बजाय समाधान की चर्चा होनी चाहिए। भाजपा ने अपनी जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं किया, बल्कि केवल दूसरों पर दोषारोपण करने का रास्ता चुना है।
अंत में: उत्तराखंड के युवा अब स्पष्ट रूप से एक बात कह रहे हैं कि वे प्रचार नहीं, बल्कि जवाबदारी, पारदर्शिता और न्याय चाहते हैं। यह समय है कि भाजपा वर्तमान की विफलताओं को स्वीकार करे और सच्चाई का सामना करे।
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साभार, टीम अमृता बाजार पत्रिका - राधिका तिवारी
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