मुख्यमंत्री धामी के प्रयासों से पिटकुल की ₹3,638 करोड़ की पारेषण परियोजना को मिली भारत सरकार की अनुमोदन
मुख्यमंत्री धामी के प्रयासों से पिटकुल की ₹3,638 करोड़ की पारेषण परियोजना को मिली भारत सरकार की अनुमोदन
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड की विद्युत पारेषण प्रणाली को मज़बूत करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लिमिटेड (पिटकुल) की ₹3,638 करोड़ की परियोजना को भारत सरकार की स्वीकृति मिली है। यह परियोजना एशियाई विकास बैंक (ADB) से ऋण वित्तपोषण के लक्ष्य में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
देहरादून। उत्तराखंड की विद्युत पारेषण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष प्रयासों के फलस्वरूप, भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (DEA) की 167वीं स्क्रीनिंग समिति की बैठक में, पिटकुल की लगभग ₹3,638 करोड़ की परियोजना को स्वीकृति दी गई है। यह बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता आर्थिक कार्य विभाग के अपर सचिव ने की।
मुख्यमंत्री धामी का केंद्रीय नेतृत्व, विशेष रूप से केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ निरंतर समन्वय इस उपलब्धि में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। शासन के प्रमुख सचिव, ऊर्जा, आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने समिति के सामने परियोजना का प्रस्तुतीकरण किया, जो कि सफल रहा।
समिति ने 'उत्तराखंड क्लाइमेट रेजिलिएंट इंट्रा-स्टेट पावर ट्रांसमिशन सिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट' (UCRISPTSDP) के अंतर्गत 255 मिलियन अमेरिकी डॉलर, अर्थात लगभग ₹2,182 करोड़ के प्रस्तावित ADB ऋण से इस परियोजना को ADB के समक्ष प्रस्तुत करने की अनुमति दी है।
इस परियोजना की कुल लागत 425 मिलियन अमेरिकी डॉलर या लगभग ₹3,638 करोड़ निर्धारित की गई है, जिसमें 60 प्रतिशत वित्तपोषण ADB के माध्यम से प्रस्तावित है। शेष 40 प्रतिशत का योगदान पिटकुल और राज्य सरकार की सहमति से किया जाएगा।
परियोजना की मुख्य विशेषताएँ
इस परियोजना के अंतर्गत निम्नलिखित प्रमुख कार्यों को प्रस्तावित किया गया है:
- 400 केवी के 03 विद्युत उपकेंद्र।
- 220 केवी के 03 विद्युत उपकेंद्र।
- 132 केवी के 03 विद्युत उपकेंद्र।
- 66 केवी का 01 विद्युत उपकेंद्र।
- विभिन्न विद्युत पारेषण लाइनों का निर्माण।
- संबंधित सिविल कार्य एवं परामर्श सेवाएँ।
इस परियोजना से कुल 10 विद्युत उपकेंद्रों तथा संबंधित पारेषण अवसंरचना के विकास का उद्देश्य प्रदेश की विद्युत पारेषण क्षमता को बढ़ाना, इसकी विश्वसनीयता में सुधार करना, और जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना करने में सहायता प्रदान करना है। यह परियोजना प्रदेश की बिजली मांग के अनुरूप पारेषण नेटवर्क को मज़बूत करने में सहायक सिद्ध होगी।
भारत सरकार की इस स्क्रीनिंग समिति की स्वीकृति के पश्चात, अब ADB द्वारा ऋण प्रस्ताव के प्रसंस्करण हेतु जरूरी विस्तृत जांच और मूल्यांकन—ड्यू डिलिजेंस—की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। इसके आधार पर ADB की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, ऋण की अंतिम स्वीकृति संबंधी कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
इस महत्त्वपूर्ण विकास के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को बधाई! प्रदेशवासियों के लिए यह साबित होता है कि निरंतर प्रयास और सही नेतृत्व हमेशा सकारात्मक परिणाम लाते हैं।
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सादर, Team Amrita Bazaar Patrika
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