मैस्कॉट डिज़ाइन और स्लोगन प्रतियोगिता में विजेताओं का सम्मान
मैस्कॉट डिज़ाइन और स्लोगन प्रतियोगिता में विजेताओं का सम्मान
ब्रेकिंग न्यूज़, दैनिक अपडेट और एक्सक्लूसिव कहानियां - अमृता बाजार पत्रिका
कम शब्दों में कहें तो, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने मैस्कॉट डिज़ाइन और स्लोगन प्रतियोगिता में विजेताओं को सम्मानित किया।
देहरादून। किसी संस्था की पहचान सिर्फ उसकी भौतिक उपस्थिति और योजनाओं पर निर्भर नहीं करती है, बल्कि लोगों की सोच और उनके साथ जुड़ाव भी महत्वपूर्ण है। इसी धारणा को ध्यान में रखते हुए, एमडीडीए ने पहली बार अपनी नई पहचान को जनता की रचनात्मकता से जोड़ने के लिए एक पहल की है। हाल ही में आयोजित मैस्कॉट डिज़ाइन एवं स्लोगन प्रतियोगिता-2026 के विजेताओं को एमडीडीए कार्यालय में एक समारोह के दौरान सम्मानित किया गया।
प्रतियोगिता की प्रस्तुतियां और उनके विजेता
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी उपस्थित थे। इस आयोजन में एमडीडीए के अधिकारियों और प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों का भी समर्थन रहा। विजेताओं को पुरस्कार राशि एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर उनकी प्रतिभा को सराहा गया।
स्नेहा भण्डारी ने मैस्कॉट प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया, जिसके लिए उन्हें 50 हजार रुपये और प्रशस्ति-पत्र से सम्मानित किया गया। द्वितीय स्थान पर रहे अनुराग रमोला को 30 हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया, जबकि तीसरे स्थान पर अंकिता बिष्ट रही, जिन्हें 15 हजार रुपये की पुरस्कार राशि मिली।
स्लोगन प्रतियोगिता में अंकित सिंह रावत ने पहला पुरस्कार हासिल किया, जिसके लिए उन्हें 10 हजार रुपये और प्रशस्ति-पत्र दिया गया। यह पहल दर्शाती है कि एक संस्था की पहचान केवल उसके कार्यों से नहीं, बल्कि उसकी सोच और समाज से उसका जुड़ाव भी बना सकती है।
जनता को पहचान गढ़ने का अवसर
यह प्रतियोगिता 3 से 16 अगस्त के बीच आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य केवल प्रतीक या स्लोगन का चयन करना नहीं था, बल्कि भविष्य की दिशा को रचनात्मकता में रूपांतरित करना था। पहली बार आम जनता, युवाओं, और रचनात्मक लोगों को यह अवसर मिला कि वे अपनी कल्पना द्वारा एमडीडीए की पहचान का हिस्सा बन सकें।
इस प्रतियोगिता ने यह दिखाया कि किसी संस्था से जुड़ाव केवल उसके कार्यों को देखने तक सीमित नहीं है। जब लोगों को अपनी सोच रखने का मौका मिलता है, तब वह जुड़ाव एक नई पहचान में परिवर्तित हो सकता है। आयोजक ने उन रचनात्मक प्रतिभाओं को सम्मानित किया जिन्होंने अपनी उत्कृष्ट प्रविष्टियों के माध्यम से इस प्रक्रिया में योगदान दिया।
सोच से पहचान तक का सफर
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने विजेताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रतियोगिता में दिखाई गई रचनात्मकता इस बात का सबूत है कि जनता की अपनी कल्पनाएं और विचार हैं। उन्होंने कहा कि एमडीडीए का लक्ष्य केवल विकास नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी और नवाचार को भी बढ़ावा देना है।
इस समारोह ने यह संदेश दिया कि जब किसी संस्था की पहचान बनाने की प्रक्रिया में समाज की कल्पनाएं शामिल होती हैं, तो वह पहचान एक सामान्य प्रतीक नहीं रह जाती, बल्कि यह लोगों से जुड़ी एक कहानी बन जाती है।
अधिक समाचारों के लिए, यहाँ क्लिक करें.
सादर, टिम अमृता बाजार पत्रिका
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0