रामलीला मंच पर डॉ. हरक सिंह रावत का प्रेरणादायक संदेश: संस्कृति से सीखें जीवन के मूल्य और उत्तराखंड के विकास में निभाएं अपनी भूमिका

May 30, 2026 - 14:44
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रामलीला मंच पर डॉ. हरक सिंह रावत का प्रेरणादायक संदेश: संस्कृति से सीखें जीवन के मूल्य और उत्तराखंड के विकास में निभाएं अपनी भूमिका
रामलीला मंच पर डॉ. हरक सिंह रावत का प्रेरणादायक संदेश: संस्कृति से सीखें जीवन के मूल्य और उत्तराखंड के विकास में निभाएं अपनी भूमिका

रामलीला मंच पर डॉ. हरक सिंह रावत का प्रेरणादायक संदेश: संस्कृति से सीखें जीवन के मूल्य और उत्तराखंड के विकास में निभाएं अपनी भूमिका

कम शब्दों में कहें तो, पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने रामलीला के नवें दिन आयोजित भव्य समारोह में अपने विचार साझा किए। उन्होंने सांस्कृतिक मूल्यों का जीवन में महत्व बताया और उत्तराखंड के विकास में सभी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

टिहरी गढ़वाल। रामलीला के नवें दिन भव्य आयोजन में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने दीप प्रज्ज्वलित कर रामलीला का उदघाटन किया। आयोजन समिति की ओर से सभी अतिथियों को भगवान श्री राम नाम का अंग वस्त्र और मोमेंटो भेंट कर उनका स्वागत किया गया।

रामलीला: बस मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन की सीख

अपने उद्घाटन भाषण में डॉ. रावत ने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने वाली एक सांस्कृतिक पाठशाला है। उन्होंने जनता को यह स्मरण कराया कि भगवान राम के आदर्शों जैसे त्याग, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा को अपने जीवन में अपनाना ही इन आयोजनों का असली उद्देश्य है। यह हम सभी को सामाजिक और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करता है।

जीवन और मृत्यु का शाश्वत सत्य

अपने संबोधन में डॉ. रावत ने जीवन और मृत्यु के अनश्वर सत्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन के अनिश्चितता में हमें भी सबसे महत्वपूर्ण यह समझना चाहिए कि मृत्यु अटल सत्य है। ऐसे सांस्कृतिक मंच हमें नैतिकता और अनैतिकता के बीच के अंतर को समझाने में मदद करते हैं और समाज को सही दिशा दिखाते हैं।

डॉ. हरक सिंह रावत ने 2013 की केदारनाथ आपदा और कोरोना महामारी के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में मानवीय संवेदनाओं और आपसी रिश्तों की महत्व सबसे अधिक होती है। संकट के समय समाज की एकजुटता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती है।

श्यामला झील की गिलहरी की सीख

डॉ. रावत ने रामायण की गिलहरी का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे गिलहरी ने रामसेतु निर्माण में अपना छोटा सा योगदान दिया था, उसी तरह हर व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने सभी लोगों से उत्तराखंड के विकास और देवभूमि की समृद्धि के लिए सकारात्मक योगदान देने की अपील की।

विशिष्ट जनों की उपस्थिति

इस कार्यक्रम में विधायक विक्रम सिंह नेगी, नगर पालिका परिषद टिहरी के अध्यक्ष मोहन सिंह रावत, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुरारी लाल खंडवाल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता राकेश राणा समेत अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का माहौल धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सरोकारों से ओतप्रोत रहा, जहां उपस्थित लोगों ने रामलीला के माध्यम से भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

समिति के सदस्यों की भूमिका

इस अवसर पर समिति के संयोजक डॉ. राकेश भूषण गोदियाल और अन्य सदस्यों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन समिति के संरक्षक और कुशल वक्ता श्री सतीश थपलियाल ने किया।

इस प्रकार, रामलीला का यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक बल्कि सांस्कृतिक जागरूकता का एक बड़ा उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह हमें अपने कर्तव्यों और सामूहिकता का ध्यान दिलाता है।

और इस तरह, डॉ. रावत ने attendees को न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामाजिक विकास के लिए भी प्रेरित किया। इसके साथ ही, उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति और उसके विकास पर ध्यान केंद्रित किया।

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सादर,
टीम अमिता बजार पत्रिका
- सुमित्रा शर्मा

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