वन्य जीवों के लिए सुरक्षा का नया अध्याय: वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का निर्माण
वन्य जीवों के लिए सुरक्षा का नया अध्याय: वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का निर्माण
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कम शब्दों में कहें तो, दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे पर बना एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर वन्य जीवन की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इस कॉरिडोर के निर्माण से मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आने की संभावना है, जो पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने में सहायक होगा।
दिल्ली से देहरादून जाने वाले सफर में एक नया आयाम जोड़ते हुए, वाइल्ड लाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण किया गया है। यह कॉरिडोर 12 किलोमीटर लंबा है और इसके तहत कुल 20 किलोमीटर वन क्षेत्र को शामिल किया गया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य वन्य जीवों का संरक्षण और सुरक्षा करना है।
परियोजना के उद्देश्यों और विशेषताएँ
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने हाल ही में एक प्रेस कांफ्रेंस में इस प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह भारत में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस कॉरिडोर का निर्माण उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग और उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरता है, जिससे वन्य जीवों को सुरक्षित आवागमन का अवसर प्राप्त होगा।
वर्तमान में, इस परियोजना में 40 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट से महत्वपूर्ण कार्य करवाए जा रहे हैं, जैसे की प्रतिपूरक वृक्षारोपण। कुल 165.5 हेक्टेयर भूमि पर 1.95 लाख पेड़ लगाए गए हैं। इस परियोजना के तहत सभी प्रकार के एहतियाती उपाय अपनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है, जैसे कि साउंड और लाइट बैरियर्स का निर्माण।
वन्य जीवों की सुरक्षा में योगदान
इस एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर में हाथियों के लिए अंडरपास और अन्य वन्यजीवों के लिए पैस बने हैं, जिससे वे निर्बाध रूप से अपना आवागमन कर सकें। वन मंत्री ने जोर दिया कि इस कॉरिडोर के माध्यम से आने वाले वर्षों में मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी और विभिन्न प्रजातियों के बीच आनुवंशिक आदान-प्रदान में सुधार होगा।
निष्कर्षतः इस परियोजना से अगले 20 वर्षों में 240 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 60 से 68 लाख पेड़ों द्वारा किए जाने वाले कार्बन अवशोषण के बराबर है। यह परियोजना न केवल वन्य जीवों के लिए एक सुरक्षा कवच साबित होगी, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाने में मदद करेगी।
तकनीकी दृष्टिकोण से वृक्षों का संरक्षण
दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे परियोजना के निर्माण के दौरान पहले अनुमानित 45,000 पेड़ों के बजाय, वैज्ञानिक विधियों और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से 33,840 पेड़ों की रक्षा की गई। इस प्रकार, इस परियोजना ने पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को साबित किया है।
इसके अलावा, यह कॉरिडोर पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझाने और सबके लिए एक प्रेरणा बनेगा।
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सभी पक्षों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरता यह कॉरिडोर निश्चित रूप से भविष्य के लिए एक सुखद लक्ष्य को साधने का प्रयास करेगा।
- टीम अमृता बाजार पत्रिका (माधवी रावत)
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