सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सहायता के लिए ‘पीएम राहत’ और ‘नेक राहगीर’ योजना - विशेष संगोष्ठी में हुआ जोर

Oct 16, 2026 - 21:44
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सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सहायता के लिए ‘पीएम राहत’ और ‘नेक राहगीर’ योजना - विशेष संगोष्ठी में हुआ जोर
सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सहायता के लिए ‘पीएम राहत’ और ‘नेक राहगीर’ योजना - विशेष संगोष्ठी में हुआ जोर

सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सहायता के लिए ‘पीएम राहत’ और ‘नेक राहगीर’ योजना - विशेष संगोष्ठी में हुआ जोर

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में ‘पीएम राहत’ और ‘नेक राहगीर’ योजनाओं की उपयोगिता पर विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को त्वरित और निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण चर्चाएं की गईं।

देहरादून के सर्वे चौक स्थित अनुसंधान विकास एवं प्रशिक्षण संस्थान (आईआरडीटी) ऑडिटोरियम में एक दिवसीय विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री खजान दास और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान द्वारा दीप प्रज्वलित करके किया गया। संगोष्ठी में पुलिस, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ विशेषज्ञ और चिकित्सक भी उपस्थित रहे।

जीवन रक्षा के लिए संवेदनशीलता आवश्यक - खजान दास

मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री खजान दास ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में राहत एवं बचाव कार्यों में संवेदनशीलता आवश्यक है। उन्होंने कहा, “दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाना और प्राथमिकता के आधार पर उपचार उपलब्ध कराना जीवन बचाने का महत्वपूर्ण कदम है।” खजान दास ने संगोष्ठी को जनहित में महत्वपूर्ण बताते हुए इन योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया ताकि अधिक से अधिक लोग इन योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकें और जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आएं।

त्वरित उपचार ही सच्ची मानव सेवा - डॉ. आशीष चौहान

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने भी अपनी बात में कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्ति केवल एक व्यक्ति नहीं है, बल्कि यह किसी परिवार की उम्मीदों और जिम्मेदारियों का आधार होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दुर्घटना के बाद परिवार जिस पीड़ा और संकट से गुजरता है, उसे समझते हुए हमें मानवीय संवेदना के साथ आगे आना चाहिए। घायल को समय पर उपचार उपलब्ध कराना ही सच्ची मानव सेवा है।

कैशलेस उपचार की व्यवस्था

विशेषज्ञों ने बताया कि भारत सरकार की प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को ₹1.50 लाख तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही, गोल्डन ऑवर के दौरान अस्पताल पहुँचाने वाले राह-वीर को ₹25,000 तक की पुरस्कार राशि देने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, वर्षभर में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चयनित राह-वीरों को राष्ट्रीय स्तर पर ₹1 लाख की पुरस्कार राशि, ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाता है।

घायलों की मदद के लिए बेहतरीन प्रयास

इन योजनाओं का उद्देश्य केवल त्वरित उपचार नहीं, बल्कि आम नागरिकों को बिना किसी भय या संकोच के घायलों की सहायता के लिए प्रोत्साहित करना भी है। विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और जनसहभागिता की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

सड़क दुर्घटनाओं की alarming statistics

संगोष्ठी के दौरान प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, देश में हर वर्ष अनुमानित 5.13 लाख सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं, जिनमें लगभग 1.83 लाख लोगों की मौत होती है। हर घंटे औसतन 21 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में जान चली जाती है। युवाओं की इस आंकड़े में हिस्सा चिंताजनक है, क्योंकि 18 से 34 वर्ष आयु वर्ग के लोग इनमें सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

विशेषज्ञों ने बताया कि सड़क सुरक्षा को बढ़ाने के लिए त्वरित उपचार, प्रभावी राहत एवं बचाव व्यवस्थाओं और सामूहिक जनसहभागिता पर ध्यान देना आवश्यक है। कार्यक्रम में सभी विशेषज्ञों ने योजना के तहत ई-डीएआर और टीएमएस प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी साझा की।

यह संगोष्ठी विभिन्न विभागों को एकजुट होकर योजना का प्रचार-प्रसार करने और सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों के लिए प्रभावी सहायता तंत्र विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

फिर से याद दिलाते हुए, सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों की सहायता हेतु ‘पीएम राहत’ और ‘नेक राहगीर’ योजनाएं एक वरदान साबित हो रही हैं, जिससे मानवता की सच्ची सेवा की जा रही है।

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संपादित: स्नेहा मिश्रा, Team Amrita Bazaar Patrika

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