21 साल से हक के लिए संघर्ष: बांध प्रभावित परिवारों की लम्बी यात्रा

Sep 29, 2026 - 00:44
 127  158k
21 साल से हक के लिए संघर्ष: बांध प्रभावित परिवारों की लम्बी यात्रा

21 साल से हक के लिए संघर्ष: बांध प्रभावित परिवारों की लम्बी यात्रा

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Amrita Bazaar Patrika

कम शब्दों में कहें तो, टिहरी बांध परियोजना के तहत प्रभावित परिवारों को 21 साल बाद भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। पिछले 21 वर्षों से संघर्षरत ये परिवार उद्दीपन के बिना सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

पडागली की कहानी

टिहरी गढ़वाल के ग्राम पडागली में पांच परिवारों की पूरी भूमि वर्ष 2005 में टिहरी बांध की झील में समा गई। इन परिवारों की सम्पत्ति राजस्व अभिलेखों में टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के नाम दर्ज है। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी, इन परिवारों को पुनर्वास सुविधाओं का लाभ नहीं मिल सका है।

सरकारी उपेक्षा और न्याय की तलाश

भिलंगना ब्लॉक की सुरजा देवी, जो बांध प्रभावित हैं, ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन देकर अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि उनकी भूमि, जो पिछले 21 साल से पानी में डूबी हुई है, के बावजूद उन्हे पुनर्वास में किसी प्रकार की सहायता नहीं मिली है।

घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इन प्रभावितों की जमीन परियोजना के नाम पर दर्ज की जा चुकी है, तो इन परिवारों को अन्य प्रभावितों की तुलना में उनके अधिकारों से वंचित क्यों रखा जा रहा है? वे अन्य प्रभावित परिवारों के समान ही पुनर्वास पैकेज और क्षतिपूर्ति पाने का हक रखते हैं।

पुनर्वास निदेशालय का ध्यान

बांध प्रभावित परिवारों के बीच हालात को देखते हुए, जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने मामले का संज्ञान लिया है और पुनर्वास कार्यालय को आवश्यक पत्रावली प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके तहत, यह स्पष्ट किया जाएगा कि आखिरकार इन परिवारों की पात्रता कब तय होगी और उनका पुनर्वास कब होगा।

भविष्य की उम्मीदें

प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि डीएम के आदेश के बाद उनके लंबित मामलों का समाधान होगा और उन्हें उनका वैधानिक अधिकार मिलेगा। इस स्थिति में, प्रभावितों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है।

निष्कर्ष

अंततः, यह स्थिति टिहरी बांध परियोजना के प्रभाव के बारे में गंभीर विचार मांगती है। जब विभिन्न प्रभावित परिवारों को अपनी जमीन के लिए मुआवजा और पुनर्वास पैकेज मिल चुके हैं, तो इन विशेष परिवारों की अनदेखी क्यों हो रही है? यह प्रक्षिप्त रुख न केवल स्वच्छता और अधिकार की भावना को कमजोर करता है, बल्कि यह सरकार की प्रतिबद्धता पर भी प्रश्न उठाता है।

अभी देखने की बात यह है कि क्या जिलाधिकारी के निर्देश और लोगों की लड़ाई का असर होगा या यह मामला अभी और लंबा चलेगा।

अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक करें.

सादर,

टीम अमृता बाजार पत्रिका

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0