अंकिता मर्डर केस: सीबीआई जांच को लेकर सीएम आवास का घेराव, उमेश कुमार पर उठे सवाल
अंकिता मर्डर केस: सीबीआई जांच को लेकर सीएम आवास का घेराव, उमेश कुमार पर उठे सवाल
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कम शब्दों में कहें तो, अंकिता भंडारी के हत्याकांड के मामले में सीबीआई जांच और आरोपितों पर कई जटिल सवाल उठ रहे हैं।
देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच को लेकर आज विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक, और आंदोलनकारी संगठन मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। इस मुद्दे पर देशभर में चर्चाएँ तेज हो गई हैं और इसकी पृष्ठभूमि में हल्द्वानी, दून, और गदरपुर जैसे क्षेत्रों में जबरदस्त प्रदर्शन भी हो रहे हैं।
प्रदर्शन और राजनीतिज्ञों का आक्रोश
घेराव से पूर्व विभिन्न स्थानों पर धूमधाम के साथ प्रदर्शन व मशाल जुलूस निकाले जा रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को कोटद्वार में प्रदर्शनकारियों द्वारा आक्रोशित होकर झंडे दिखाए गए।
इसी बीच, 3 जनवरी को एसआईटी की जांच से जुड़े अधिकारियों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई वीआईपी शामिल नहीं है, लेकिन यह भी कहा कि अंकिता भंडारी पर अनैतिक काम के लिए पुलकित आर्य और उसके साथियों द्वारा दबाव बनाया गया था।
उमेश कुमार का बयान और पूर्व सीएम का प्रतिवाद
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के 24 सितंबर 2022 की फेसबुक पोस्ट को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उमेश कुमार ने उस पोस्ट में लिखा था कि अंकिता भंडारी के हत्यारे पुलकित आर्य के रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलाया जाएगा।
इसे लेकर हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड की बेटी अंकिता के हत्यारे के लिए बुलडोजर चलाने वाले हर नेता को उत्तराखंड की जनता को जवाब देना चाहिए। उधर, उमेश कुमार की इस गतिविधियों पर सोशल मीडिया में काफी निंदा की जा रही है।
अंकिता भंडारी की हत्या और उसके पीछे की कहानी
अंकिता भंडारी की हत्या के केस में कई सारे सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता सुजाता पॉल ने भी उमेश कुमार को निशाना बनाते हुए कहा कि उन पर आरोप है कि उन्होंने सबूतों को नष्ट किया है। इसके अलावा, पूर्व विधायक उर्मिला सनावर ने भी इस केस में विस्तार से जांच की मांग की है।
पुलिस की जांच और स्पष्टता
उत्तराखंड पुलिस ने अपने पक्ष में यह स्पष्ट किया है कि अंकिता भंडारी प्रकरण में कोई वीआईपी शामिल नहीं है। इसके लिए पुलिस ने विस्तृत विवेचना की है और इस बात का समर्थन किया है कि आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में रखा गया है।
उत्तराखंड पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह से निष्पक्ष और तथ्य परक है। पुलिस का कहना है कि अंकिता भंडारी की हत्या मामले में कोई सबूत न तो छिपाए गए हैं और न ही नष्ट किए गए हैं।
पुलिस ने घोषणा की है कि अगर किसी के पास कोई अतिरिक्त साक्ष्य है तो वे आगे आकर पुलिस को उपलब्ध कराएं। यह जांच आगे भी जारी रहेगी और हर प्रकार की सूचना को गंभीरता से लिया जाएगा।
निष्कर्ष
अंकिता भंडारी के मामले में राज्य भर में गुस्सा और आक्रोश उभरता जा रहा है। मुख्यमंत्री आवास के घेराव के माध्यम से आंदोलनकारियों ने अपनी आवाज उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच और उसके परिणामों के आधार पर राजनीतिक व सामाजिक प्रतिक्रियाओं में बदलाव भी देखने को मिल सकता है।
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सादर, टीम अमृता बाजार पत्रिका
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