अंकिता मर्डर: महापंचायत ने सीबीआई जांच को किया खारिज, वीआईपी की भूमिका पर उठे सवाल
अंकिता मर्डर: महापंचायत ने सीबीआई जांच को किया खारिज, वीआईपी की भूमिका पर उठे सवाल
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कम शब्दों में कहें तो, अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर हुई महापंचायत में मौजूदा सीबीआई जांच पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। परिवार और स्थानीय नागरिकों ने जांच को भ्रामक और अधूरा बताया है।
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वीआईपी की भूमिका पर उठे सवाल
देहरादून में आयोजित महापंचायत में अंकिता भंडारी मर्डर केस की सीबीआई जांच पर चिंता जताई गई। इसमें अंकिता के माता-पिता की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने भाजपा विधायक रेणु बिष्ट की भूमिका की जांच की मांग की। उनका कहना था कि वनन्तरा रिसॉर्ट में बुलडोजर चलवाने वाली विधायक की काल डिटेल और अन्य सबूत सामने आनी चाहिए।
पंचायत में करीब पांच घंटों तक जनगीतों के बीच वक्ताओं ने मौजूदा सीबीआई जांच को महज एक छलावा करार दिया। उन्होंने एक स्वर में कहा कि अंकिता ने अपनी आवाज उठाई, जिसके कारण उसे अपनी जान गंवानी पड़ी। इसके साथ ही राष्ट्रपति को समर्पित ज्ञापन भी पढ़ा गया।
महापंचायत ने यह भी स्पष्ट किया कि κυβέρνηση और सीबीआई की जांच पर से कोई भरोसा नहीं किया जा सकता। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यह जांच केवल वीआईपी को बचाने के लिए की जा रही है, और इसे जनता को छिपाने का एक तरीका समझा जा रहा है।
सीबीआई जांच की प्रयोजनता पर सवाल
रविवार को हुई महापंचायत में मौजूद सभी वक्ताओं ने एकजुट होकर कहा कि सीबीआई की जांच विषय मेंTransparency की कमी है। उन्हें चिंता है कि क्या अंकिता को उचित न्याय मिल सकेगा। इस दौरान अन्य कई वक्ताओं ने भी सरकार पर आरोप लगाया कि वह VIP को बचाने के लिए इस प्रमुख केस को कमजोर कर रही है।
आंदोलनकारी कमला पंत ने कहा कि किसी भी जांच की बुनियाद एफआईआर होती है और जो एफआईआर यहाँ पर की गई है, वह संदिग्ध प्रतीत होती है। उन्हें यह भी चिंता है कि माता-पिता की शिकायत को नजरअंदाज किया गया।
न्याय की अवहेलना पर जमकर बोला गया
महापंचायत में मौजूद अन्य नेताओं ने इसे राजनीति का मामला नहीं बल्कि एक गंभीर मानवाधिकार मुद्दा करार दिया। उन्होंने कहा कि न्याय की मांग करने का यह आंदोलन किसी भी पार्टी के पक्ष में नहीं है, बल्कि यह एक जन भावना है।
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुजाता पॉल ने भी यही बात कहकर इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित किया और यह संकल्प व्यक्त किया कि वह अंतिम सांस तक अंकिता को न्याय दिलाने का संघर्ष करती रहेंगी।
भाकपा नेता इन्द्रेश मैखुरी ने भी उठाया सवाल
भाकपा माले नेता इन्द्रेश मैखुरी ने कहा कि अंकिता के परिवार को जानबूझकर मामले से अलग रखा जा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि जब सभी लोग इस केस के लिए तैयारियों में जुटे थे, ठीक उसी समय भाजपा के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का स्वागत किया जा रहा था।
महापंचायत में यह निर्णय लिया गया कि राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा जाएगा। वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि वर्तमान सीबीआई जांच पर विश्वास नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
इस महापंचायत से यह स्पष्ट हो गया है कि अंकिता भंडारी की हत्या का मामला केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक और समाजशास्त्रीय प्रश्न बन गाया है। लोग न्याय की तलाश में हैं और जब तक उन्हें यह नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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लेखिका: स्वाति नेगी, Team Amrita Bazaar Patrika
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