असम के चाय बागानों में महिला श्रमिकों के संग कृषि मंत्री गणेश जोशी का दौरा, चाय की पत्तियां खुद तोड़ीं
असम के चाय बागानों में महिला श्रमिकों के संग कृषि मंत्री गणेश जोशी का दौरा, चाय की पत्तियां खुद तोड़ीं
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कम शब्दों में कहें तो, कृषि मंत्री गणेश जोशी ने असम के हाथीकुली चाय बागान का दौरा करते हुए महिला श्रमिकों के साथ काम किया और चाय की पत्तियां खुद तोड़ीं। इस कदम से उन्होंने राज्य की चाय उद्योग की महिला श्रमिकों की मेहनत को सराहा।
प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने अपने असम भ्रमण के दौरान आज असम के हाथीकुली चाय बागान का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां कार्यरत महिला श्रमिकों से संवाद किया तथा खुद ताजा चाय की पत्तियां तोड़कर उन्हें पारंपरिक टोकरी में एकत्रित किया। उनका यह कदम न केवल श्रमिकों के प्रति सहयोग का प्रतीक था, बल्कि क्षेत्र की चाय उत्पादन प्रक्रियाओं के प्रति उनकी गंभीरता का भी संकेत देता है।
असमिया चाय: राज्य की आत्मा
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने असमिया चाय को राज्य की आत्मा बताते हुए चाय बागान से जुड़े कड़ी मेहनत करने वाले परिवारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि असम की चाय उद्योग से जुड़ी परंपराएं और श्रमिकों का समर्पण देशभर के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। इस दौरान उन्होंने इन श्रमिकों से उनकी चुनौतियों और सफलता की कहानियों को भी सुना, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि असम की चाय न केवल आर्थिक दृष्टिकोन से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक रूप से भी बेहद प्रभावशाली है।
चाय फैक्टरियों का निरीक्षण
भ्रमण के दौरान कृषि मंत्री जोशी ने हाथीकुली स्थित चाय फैक्ट्री का भी निरीक्षण किया। उन्होंने चाय की उत्पादन क्षमता, प्रसंस्करण और विपणन प्रणाली की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इसके साथ ही, उन्होंने फैक्ट्री में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीक और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं का अवलोकन भी किया। उनका कहना था कि उत्तराखंड में भी चाय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए असम के अनुभवों और पद्धतियों का अध्ययन किया जाएगा और उन्हें लागू किया जाएगा।
उत्तराखंड में चाय उत्पादन का भविष्य
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि वर्तमान में उत्तराखंड में 1592 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर चाय बागानों का विकास और रखरखाव किया जा रहा है। इस प्रयास में लगभग 7 लाख किलोग्राम हरी चाय पत्तियों का उत्पादन करके 1.44 लाख किलोग्राम प्रसंस्कृत चाय का उत्पादन एवं बिक्री की जा रही है। इसके अतिरिक्त, राज्य में चाय उत्पादन को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ टी-टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। योजनाएं घोड़ाखाल, चम्पावत और कौसानी में लागू की जा रही हैं।
किसानों की आय में वृद्धि
कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने और उत्तराखंड की चाय को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने चाय बोर्ड के अंतर्गत उत्तराखंड में वर्तमान में संचालित 5 चाय फैक्ट्रियों की जानकारी भी साझा की।
इस अवशर पर सल्ट विधायक महेश जीना, कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल, कृषि सचिव डॉ. एसएन पांडेय, चाय निदेशक महेन्द्र पाल, मैनेजर मित्राभानु दास सहित अन्य चाय उत्पादक भी उपस्थित रहे।
यह दौरा न केवल कृषि मंत्री गणेश जोशी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि असम के चाय उद्योग के विकास और सुधार के लिए एक नई दिशा प्रदान करता है। गणेश जोशी के प्रयासों से निश्चित रूप से चाय उत्पादन में प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता में वृद्धि होगी।
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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका
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