उत्तराखंड: अधिकारी की बैठक में अनुपस्थिति पर सैलरी रोकी गई, डीएम की सख्ती

Jan 30, 2026 - 14:44
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उत्तराखंड: अधिकारी की बैठक में अनुपस्थिति पर सैलरी रोकी गई, डीएम की सख्ती
उत्तराखंड: अधिकारी की बैठक में अनुपस्थिति पर सैलरी रोकी गई, डीएम की सख्ती

उत्तराखंड: अधिकारी की बैठक में अनुपस्थिति पर सैलरी रोकी गई, डीएम की सख्ती

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के एक अधिकारी की बैठक में गैरमौजूदगी के चलते उनका वेतन रोकने का आदेश दिया गया है। यह कदम बजट व्यय में कमी के कारण उठाया गया है।

मीटिंग में अनुपस्थिति पर कड़ी कार्रवाई

हाल ही में आयोजित एक बैठक में कई अधिकारियों की अनुपस्थिति ने शासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया। उत्तराखंड के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, जो कि जिलाधिकारी (डीएम) हैं, ने बैठक में अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए उनके वेतन को रोकने का निर्देश दिया है। अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

80% से कम व्यय पर स्पष्टीकरण तलब

इसके अतिरिक्त, जिन विभागों का व्यय 80% से कम रहा है, उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। यह निर्देश उन विभागों के लिए खासतौर पर लागू किया गया है जो बजट के शेष भाग का प्रबंधन सही ढंग से नहीं कर पा रहे हैं। जिलाधिकारी की इस सख्ती को उनकी नीतियों और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।

धीमी प्रगति वाले विभागों को अंतिम चेतावनी

जिलाधिकारी ने धीमी प्रगति दिखा रहे विभागों को यह चेतावनी दी है कि यदि योजनाएं समय पर पूरी नहीं की गईं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कदम पीएम गतिशक्ति योजना से लेकर जिला योजनाओं तक के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है।

क्या हैं नए दिशा-निर्देश?

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सभी अधिकारियों को अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करना होगा। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि सभी योजनाएं समय पर पूरी हों और बजट का प्रयोग सही दिशा में हो। इस संबंध में और भी कई निर्देश सामने आए हैं, जो आगामी बैठकों में विशेषज्ञता संतोषजनक जवाब देने पर जोर देंगे।

अंत में

उत्तराखंड में डीएम की इस सख्ती से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार अपने अधिकारियों को उनके कार्यों के लिए जवाबदेह बनाना चाहती है। अधिकारियों की अनुपस्थिति और बजट के व्यय में वृद्धि को लेकर सरकार की यह नीति निश्चित रूप से अनुशासन को बढ़ावा देगी और विकास योजनाओं की दिशा में सकारात्मक प्रभाव डालेगी। ऐसे में अधिकारी यदि समय पर और सक्रिय रहेंगे, तो निश्चित रूप से यह राज्य के विकास में सहायक सिद्ध होगा।

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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका

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