उत्तराखंड आंदोलन के महानायक भगवान सिंह रावत “ठेकेदार जी” का निधन, समाज में गहरी छाप छोड़ गए
भगवान सिंह रावत “ठेकेदार जी” का अंतिम संस्कार: उत्तराखंड आंदोलन के सच्चे नायक
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के अग्रणी योद्धा भगवान सिंह रावत “ठेकेदार जी” का निधन, समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
टिहरी गढ़वाल, 02 जून – उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के एक प्रमुख योद्धा, समाजसेवी और कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता भगवान सिंह रावत “ठेकेदार जी” (86 वर्ष) का 1 जून को उनके पैतृक आवास पर निधन हो गया। उनकी सेवाएं उत्तराखंड के विकास और सामाजिक न्याय के लिए अमूल्य थीं। अंतिम संस्कार मंगलवार को धरासू स्थित भागीरथी तट पर हजारों लोगों की उपस्थिति में किया गया, जिसमें उनके ज्येष्ठ पुत्र ने मुखाग्नि दी।
स्वर्गीय रावत का योगदान
भगवान सिंह रावत का जीवन स्वतंत्रता संग्राम की विचारधारा से प्रेरित था। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी समाज सेवा, जनहित और उत्तराखंड राज्य आंदोलन के लिए समर्पित की। उनकी स्पष्टवादिता और सरल स्वभाव के कारण उन्हें क्षेत्र में गहरा सम्मान प्राप्त था। वे हमेशा लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं का समाधान करते थे। उनका निधन समाज और क्षेत्र के लिए एक गहरी छाप छोड़ गया है।
श्रद्धांजलि सभा में समर्पण
भगवान सिंह रावत के अंतिम संस्कार एवं श्रद्धांजलि सभा में पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश धनै, कांग्रेस नेता राकेश राणा, सैयद मुशर्रफ अली, आनंद सिंह बेलवाल, पराग जैन, वीरेंद्र सिंह रावत, सुनील जुयाल, स्वराज पवार, अजय रावत, नरेन्द्र सिंह नेगी, श्रीपाल सिंह चौहान और लब्बू नौटियाल सहित कई प्रमुख जनप्रतिनिधि, अधिवक्ता और क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित थे। वक्ताओं ने भगवान सिंह रावत को उत्तराखंड आंदोलन और सामाजिक चेतना का सच्चा प्रहरी बताया और उनके योगदान को याद किया। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
पारिवारिक परंपरा और उत्तराधिकार
भगवान सिंह रावत के पुत्र, जयवीर सिंह रावत, वर्तमान में जिला बार एसोसिएशन टिहरी गढ़वाल के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। वे अपने पिता की सामाजिक और राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। रावत परिवार की ये परंपरा समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगी।
भगवान सिंह रावत की विचारधारा और जनहित के प्रति उनकी निष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्रोत होंगी। उनकी सेवाएं और योगदान कभी भी भुलाए नहीं जा सकेंगे।
अंत में, एक सच्चे समाजसेवी और उत्तराखंड आंदोलन के अग्रणी योद्धा को श्रद्धांजलि देते हुए हम उनके योगदानों को याद करते हैं और उनके परिवार में इस दुखद घड़ी में सहानुभूति प्रकट करते हैं।
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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका
(नेहा शर्मा)
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