उत्तराखंड कांग्रेस की बमबारी से भाजपा में घबराहट, नए नेता शामिल
उत्तराखंड कांग्रेस की बमबारी से भाजपा में हलचल
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड कांग्रेस ने हाल ही में कई भाजपा नेताओं को अपने दल में शामिल करके भाजपा को हिला दिया है और अब राजनीतिक गहमागहमी बढ़ रही है।
नई दिल्ली। उत्तराखंड की राजनीतिक स्थिति में एक नया मोड़ आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिल्ली में उपस्थित होने के बीच, कांग्रेस ने अपनी ताकत बढ़ाने के लिए भाजपा के कई पूर्व नेताओं का स्वागत किया है। शुक्रवार को कांग्रेस में शामिल होने वाले तीन पूर्व विधायक और दो पूर्व नगर निकाय अध्यक्षों के साथ, यह संकेत मिलता है कि भाजपा के लिए स्थिति चिंताजनक होती जा रही है।
कांग्रेस में शामिल हुए भाजपा के पूर्व नेता
भाजपा के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, भीमलाल आर्य, नारायण पाल, पूर्व मेयर रुड़की गौरव गोयल, पूर्व पालिकाध्यक्ष मसूरी अनुज गुप्ता और लाखन सिंह ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। ठुकराल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी में उनकी असली पहचान को नजरअंदाज किया गया और कांग्रेस में शामिल होने का फैसला सोच-समझकर किया गया है।
भाजपा में हलचल और कांग्रस के उल्लास
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद भाजपा में हलचल मच गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस केवल चार नेताओं की पार्टी बनकर रह गई है और भाजपा को इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ये नेता निष्कासित हो चुके कारतूस हैं। जबकि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आश्वासन दिया है कि और भी कई बड़े नाम कांग्रेस में शामिल होंगे।
गोदियाल ने कहा, "हमने डेढ़ दर्जन नेताओं की सूची पार्टी हाईकमान को सौंपी है और अगले कुछ महीनों में दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिलेंगे।"
भविष्य की राजनीति पर नजरें
राजकुमार ठुकराल ने आगामी विधानसभा चुनाव के बारे में कहा कि वह कांग्रेस की मदद करेंगे ताकि 2027 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार स्थापित की जा सके। भाजपा के लिए यह चुनौती शायद अब पहले से अधिक गंभीर होती जा रही है।
इस बीच, महिला नेता मीना शर्मा के कांग्रेस से इस्तीफे की भी खबरें आई हैं, जो इस घटना को और जटिल बना सकती हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस के पूर्व सीएम हरीश रावत इस सब पर असंतुष्ट दिखाई दे रहे हैं, जिसने पार्टी में अंदरूनी हलचल को बढ़ा दिया है।
राजनीतिक समीकरणों में बदलाव
संजय नेगी, जिन्होंने 2022 में विकास में प्रमुख भूमिका निभाई थी, अब कांग्रेस में शामिल होने के लिए विचार कर रहे थे। लेकिन पार्टी के अन्य सदस्यों के विरोध ने उसकी प्रक्रिया में बाधा डाली है। ठुकराल अपनी पुरानी पार्टी के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हुए यहां से आगे बढ़ने का इरादा रखते हैं।
राजनीति में इस बार संभावनाएँ कई प्रकार की हैं। आने वाले दिनों में देखने के लिए दिलचस्प होगी कि भाजपा और कांग्रेस दोनों टीमें कैसे इस नई परिस्थिति में प्रतिक्रिया देती हैं। इस वार्तालाप ने उत्तराखंड राजनीति को नए दिशा में लाने की संभवना जताई है, हालांकि भाजपा के पास अब अपनी स्थिति को संभालने का एक अंतिम मौका बचा है।
कुल मिलाकर, यह कहना गलत नहीं होगा कि कांग्रेस ने भाजपा के लिए संभावित खतरे को और गहरा कर दिया है। समय बताएगा कि इन भाजपा नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने से किस प्रकार की सामरिक बदलाव आते हैं। अधिक अपडेट के लिए, यहाँ क्लिक करें.
टीम अमृता बाजार पत्रिका
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