उत्तराखंड की जमीन के निवेश की लूट को बर्दाश्त नहीं करेंगे- पीसी तिवारी
उत्तराखंड की जमीन के निवेश की लूट को बर्दाश्त नहीं करेंगे- पीसी तिवारी
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कम शब्दों में कहें तो, पी.सी. तिवारी ने धामी सरकार की भूमि लीज योजना का विरोध किया। उनकी मान्यता है कि यह योजना उत्तराखंड की प्राकृतिक संपत्तियों को बड़े पूंजीपतियों के हाथ में सौंपने की कोशिश है।
अल्मोड़ा। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के संस्थापक एवं संयोजक पी.सी. तिवारी ने राज्य सरकार के खिलाफ एक जोरदार आवाज उठाई है, जिसमें उन्होंने कहा कि निवेश के नाम पर जमीन की लूट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह बात तब कही जब धामी सरकार द्वारा यूआईआईडीबी के माध्यम से लगभग 7,000 बीघा सरकारी भूमि को दीर्घकालिक लीज पर निजी कंपनियों को सौंपने की योजना का विरोध किया।
योजना का विवरण
यह योजना होटल, रिसॉर्ट, स्कूल और वेलनेस सेंटर जैसे स्थानीय विकास के नाम पर बनाई गई है। पीसी तिवारी ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि यह केवल वर्तमान सरकार का निर्णय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भूमि अधिकारों को प्रभावित करने वाला कदम है।
नैनीसार आंदोलन की याद
उन्होंने कहा कि जिस भूमि को लेकर जनता ने नैनीसार में जिंदल समूह के खिलाफ “नैनीसार बचाओ, उत्तराखंड बचाओ” आंदोलन चलाया था, आज उसी तरह की नीति बड़े पैमाने पर लागू होने वाली है। यह आंदोलन स्थानीय लोग के भूमि अधिकार और भू-कानून की बात करने वाली सरकार के लिए एक गंभीर प्रश्न बन गया है।
सूचना का अधिकार
पीसी तिवारी ने सरकार से स्पष्टता की मांग की है कि इतनी बड़ी मात्रा में जमीन किसे, किन शर्तों पर और किस दर पर दी जा रही है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि भूमि का पूरा विवरण, लीज की शर्तें और संभावित लाभार्थियों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
स्थानीय विकास पर जोर
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने कहा है कि यदि सरकार का उद्देश्य सच में रोजगार और स्थानीय विकास है, तो सरकारी जमीन के उपयोग में स्थानीय युवाओं, ग्राम पंचायतों, महिला समूहों, सहकारी समितियों और स्थानीय उद्यमियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि खाली सरकारी भूमि का उपयोग आवास, कृषि और आजीविका के लिए किया जाना चाहिए।
धन के लिए हिमालय का विनाश नहीं
तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण इसलिए नहीं हुआ था कि पहाड़ की जमीन कुछ पूंजीपतियों के मुनाफे का साधन बने। उन्होंने हिमालय के विनाश और बाहरी धनाढ्य वर्ग के लिए उत्तराखंड को ऐशगाह में बदलने की नीति का विरोध किया।
जनसंघर्ष की जरूरत
पार्टी ने अपने संघर्ष को उत्तराखंड के अस्तित्व, भूमि अधिकार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल बनाकर जनता के बीच ले जाने का निर्णय लिया है। उन्होंने प्रदेश सरकार से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- 7,000 बीघा सरकारी भूमि को निजी हाथों में लीज पर देने की योजना तुरंत निरस्त की जाए।
- यूआईआईडीबी के तहत सभी भूमि आवंटनों का पूरा विवरण और शर्तें सार्वजनिक की जाएं।
- इस नीति पर खुली सार्वजनिक बहस कराई जाए।
- सरकारी भूमि के उपयोग में स्थानीय लोगों, ग्राम पंचायतों और सहकारी संस्थाओं को प्राथमिकता दी जाए।
- उत्तराखंड में ऐसा मजबूत भू-कानून बनाया जाए जो स्थानीय समुदायों के भूमि अधिकारों की रक्षा करे।
तिवारी ने कहा, “उत्तराखंड की जमीन किसी सरकार की जागीर नहीं है। इसे पूंजीपतियों के हवाले करने की हर कोशिश का जनता के साथ मिलकर पुरजोर विरोध किया जाएगा।”
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने प्रदेश की जनता, युवाओं, महिलाओं, किसानों और सभी लोकतांत्रिक शक्तियों से अपील की है कि वे एकजुट होकर जनआंदोलन को मजबूत करें और उत्तराखंड की जमीन और संसाधनों को बचाने के लिए आगे आएं।
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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका
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