उत्तराखंड की लोकसंस्कृति का रंग बिखेरेंगे गायक सौरव मैठाणी जापान में

Jan 28, 2026 - 14:44
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उत्तराखंड की लोकसंस्कृति का रंग बिखेरेंगे गायक सौरव मैठाणी जापान में
उत्तराखंड की लोकसंस्कृति का रंग बिखेरेंगे गायक सौरव मैठाणी जापान में

लोकगायक सौरव मैठाणी जापान में बिखेरेंगे लोकसंस्कृति के रंग

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति एक बार फिर वैश्विक पटल पर अपनी पहचान बनाने जा रही है। 01 फरवरी 2026 को टोक्यो, जापान में आयोजित होने वाले "उत्तराखंड मात्सुरी" कार्यक्रम में प्रख्यात लोकगायक सौरव मैठाणी अपने अद्भुत और भावनात्मक गायन से उत्तराखंडी संस्कृति के रंग बिखेरेंगे।

देहरादून: उत्तराखंड की संस्कृति को विश्व में पहचान दिलाने का यह एक सुनहरा अवसर है। प्रवासी उत्तराखंडी समाज द्वारा इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है जो न केवल उत्तराखंडियों के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर उपलब्ध कराएगा, बल्कि जापान में अपनी तरह का पहला सांस्कृतिक उत्सव भी होगा।

इस कार्यक्रम में दर्शकों को उत्तराखंड की संस्कृति, सभ्यता, पारंपरिक व्यंजन और लोकनृत्यों का अनुभव करने का अवसर मिलेगा। सौरव मैठाणी ढोल-दमाऊ की थाप और लोकगीतों की मिठास के साथ पारंपरिक वेशभूषा में मंच पर नजर आएंगे, जो टोक्यो की धरती पर उत्तराखंड की आत्मा को जीवंत करेंगे।

सौरव मैठाणी

इस आयोजन के प्रमुख आयोजकों में मनमलंग उत्तराखंड फिल्म्स, देसी वॉर्डरोब, मयंक डबराल, बिपिन सैमवाल, मनोज भारद्वाज, और कुलदीप बिष्ट शामिल हैं, जिनके प्रयास से इस कार्यक्रम का सफल आयोजन सुनिश्चित हुआ है।

सौरव मैठाणी अपनी गायकी के लिए बेहद प्रसिद्ध हैं और उन्होंने पहले भी कनाडा, लंदन, दुबई, ओमान, सिंगापुर जैसे कई देशों में उत्तराखंड की संस्कृति का परचम लहराया है। उनकी आवाज में पहाड़ की खुशियाँ, संघर्ष और सांस्कृतिक गहराई स्पष्ट रूप से सुनाई देती है।

यह कार्यक्रम न केवल एक सांस्कृतिक आयोजन है, बल्कि यह हर प्रवासी उत्तराखंडी के लिए अपने संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का एक अद्भुत अवसर भी है। यह जापान में उत्तराखंड की संस्कृति की एक नई पहचान स्थापित करेगा।

डिजिटल युग में, कला और संस्कृति का यह क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है। सौरव मैठाणी जैसे कलाकार हमारे सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी के सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस कार्यक्रम से यह भी स्पष्ट होगा कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह विश्व के हर कोने में अपनी छाप छोड़ सकती है।

उम्मीद है कि यह आयोजन प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए एक नई ऊर्जा और जुड़ाव लाएगा और वैश्विक मंच पर उत्तराखंड की अमिट छवि को उजागर करेगा।

कार्यक्रम के बारे में और अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.

Team Amrita Bazaar Patrika, दस्तावेजकीय अनुसंधान से समर्थित, हम आपको स्थानीय संस्कृति की महत्ता और वैश्विक पहचान को स्थापित करने के उपक्रमों पर नज़र रखने के लिए आमंत्रित करते हैं।

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