उत्तराखंड बजट से धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई दिशा: स्वामी रसिक महाराज की राय

Mar 11, 2026 - 00:44
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उत्तराखंड बजट से धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई दिशा: स्वामी रसिक महाराज की राय
उत्तराखंड बजट से धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई दिशा: स्वामी रसिक महाराज की राय

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के नवीनतम बजट से धार्मिक पर्यटन को एक नई गति मिलेगी, और यह बजट संत समाज द्वारा “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के सिद्धांत पर आधारित है।

रायवाला, 10 मार्च: रायवाला के खांड गांव नंबर-एक में स्थित नृसिंह वाटिका आश्रम में मंगलवार को एक महत्त्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संत-महात्माओं ने उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट का स्वागत किया। संत समाज ने कहा कि इस बजट से न केवल धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि प्रदेश के प्राचीन मठ-मंदिरों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।

बजट में धार्मिक पर्यटन का महत्व

सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष और नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रस्तुत बजट में “सबका साथ, सबका विकास” की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने इस बजट में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जो प्रावधान किए गए हैं, उन्हें अत्यंत सराहनीय बताया। उनका मानना है कि इससे पुराने मठ-मंदिरों का संरक्षण और विकास संभव होगा।

संस्कृति और धरोहर का संरक्षण

स्वामी रसिक महाराज ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की पहचान उसकी सनातन संस्कृति और संत परंपरा से जुड़ी हुई है। जब सरकारें धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य करती हैं, तो इससे समाज और राष्ट्र दोनों मजबूत होते हैं। उन्होंने कहा कि मठ-मंदिर हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं, उनके संरक्षण की दिशा में यह बजट एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित होगा।

धार्मिक स्थलों का विकास

संतों ने इस बजट के माध्यम से मानसखंड मंदिर माला मिशन के द्वितीय चरण में 14 मंदिरों के सुदृढ़ीकरण और केदारखंड के प्रमुख धामों—केदारनाथ, मदमहेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, और कल्पेश्वर—में श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास के निर्णय का स्वागत किया। इसके अलावा, महासू देवता हनोल, माणा, टिम्मरसैंण, और गुंजी जैसे धार्मिक स्थलों के विकास के लिए बजट प्रावधान किए जाने पर पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज का आभार व्यक्त किया गया।

धार्मिक क्षेत्र में परिवर्तन

नृसिंह वाटिका आश्रम की संचालिका साध्वी मां देवेश्वरी ने कहा कि यह बजट धार्मिक क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे मठ-मंदिरों का जीर्णोद्धार होगा और उनके पौराणिक महत्व का संरक्षण सुनिश्चित होगा। धार्मिक पर्यटन के विस्तार से युवाओं में भी संस्कृति के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होगी।

सामाजिक समावेशिता

वहीं, स्वामी विवेकानंद गिरी महाराज ने कहा कि सरकार का यह बजट समाज के सभी वर्गों के हित में है। धार्मिक स्थलों के विकास से प्रदेश की आस्था, संस्कृति, और पर्यटन को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के निर्णय समाज में जागरूकता और एकता को बढ़ावा देंगे।

संतों का समागम

इस संगोष्ठी में महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद सरस्वती, स्वामी अखंडानंद सरस्वती, स्वामी कृपालु जी महाराज, स्वामी नित्यानंद गिरी, साध्वी प्रज्ञा भारती, संत विशोकानंद गिरी सहित विभिन्न अखाड़ों से जुड़े संत-महात्मा उपस्थित रहे। सभी ने एक सुर में इस बजट की सराहना की और इसे देश और प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण बताया।

इस प्रकार, उत्तराखंड का नया बजट न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद करेगा, बल्कि इसके माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक धरोहर का सुरक्षित भविष्य भी सुनिश्चित होगा।

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