उत्तराखंड मुख्यमंत्री का प्रभावी आपदा प्रबंधन पर जोर, मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में दिए निर्देश

Jul 3, 2026 - 00:44
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उत्तराखंड मुख्यमंत्री का प्रभावी आपदा प्रबंधन पर जोर, मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में दिए निर्देश
उत्तराखंड मुख्यमंत्री का प्रभावी आपदा प्रबंधन पर जोर, मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में दिए निर्देश

उत्तराखंड मुख्यमंत्री का प्रभावी आपदा प्रबंधन पर जोर, मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में दिए निर्देश

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में अधिकारियों को प्रभावी आपदा प्रबंधन के निर्देश दिए हैं।

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को आईटी पार्क, देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में अधिकारियों को लक्ष्यीकरण और सावधानीपूर्वक आपदा प्रबंधन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि सरकार की प्राथमिकता है। मानसून के दौरान संभावित आपदाओं का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए पूर्व तैयारी और त्वरित निर्णय आवश्यक हैं।

आपदा प्रबंधन तंत्र की सुदृढ़ता

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह मॉक ड्रिल आपदा प्रबंधन तंत्र की क्षमताओं को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह केवल एक प्रशिक्षण गतिविधि नहीं है, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, संचार प्रणाली, संसाधनों की उपलब्धता, और राहत-करने वाले तंत्र की क्षमता का व्यापक परीक्षण है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन को सिर्फ राहत और बचाव कार्यों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसमें जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी और तकनीकी प्रबंधन पर भी ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

आधुनिक तकनीकों का समावेश

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में एआई आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग, और डेटा आधारित जोखिम आकलन जैसी आधुनिक तकनीकों को आपदा प्रबंधन में शामिल किया जा रहा है। इससे संभावित खतरों की समय पर पहचान करना संभव हो सकेगा, और जन-धन की हानि को कम किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आपातकालीन स्थितियों में राहत और बचाव कार्यों की त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को सशक्त बनाया जा रहा है।

हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण

मुख्यमंत्री ने जल स्रोतों का संरक्षण, ग्लेशियर अध्ययन, पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण आपदा जोखिम को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है। मॉक ड्रिल के दौरान मिले अनुभवों का विश्लेषण किया जाएगा, और सभी जनपदों को 72 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।

आपदा प्रबंधन योजना का विमोचन

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन योजना (एसडीएमपी) और राज्य के सभी 13 जनपदों की जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं का विमोचन भी किया। एसडीएमपी में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, पूर्व चेतावनी, राहत, बचाव और पुनर्वास के लिए सभी विभागों की भूमिका निर्धारित की गई है। ये योजनाएं राज्य और जनपद स्तर पर बेहतर समन्वय, तकनीकी उपयोग एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज होंगी।

आधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी

मुख्यमंत्री ने एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अग्निशमन विभाग द्वारा लगाए गए आधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, जिसमें सीबीआरएनई आपदाओं में उपयोग किए जाने वाले उपकरण शामिल थे। ऐसे उन्नत तकनीकी उपकरण आपदा के समय में सहायक सिद्ध होंगे।

आपातकालीन कार्रवाई की लाइव निगरानी

मुख्यमंत्री ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) से एक घंटे तक मॉक ड्रिल की लाइव निगरानी की। उन्होंने अधिकारियों से सीधा संवाद कर विभिन्न जनपदों में राहत कार्रवाई की जानकारी ली और जन-धन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

जन सुरक्षा को प्राथमिकता में रखना

राज्य स्तरीय मानसून मॉक ड्रिल की समीक्षा के दौरान, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सूखे और जर्जर पेड़ों की पहचान कर उन्हें हटााने के निर्देश भी दिए ताकि बारिश के दौरान संभावित दुर्घटनाओं को टाला जा सके। वे जनप्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित करने के लिए भी अधिकारियों को प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री का उद्देश्य उत्तराखंड को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाना है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि वे आपदा की पूर्व तैयारी, तकनीकी जानकारी और जनभागीदारी को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करें।

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टीम अमृता बाजार पत्रिका

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