उत्तराखंड में 16, 17 और 18 मार्च को 13 जनपदों में मॉक ड्रिल का आयोजन

Feb 28, 2026 - 21:44
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उत्तराखंड में 16, 17 और 18 मार्च को 13 जनपदों में मॉक ड्रिल का आयोजन
उत्तराखंड में 16, 17 और 18 मार्च को 13 जनपदों में मॉक ड्रिल का आयोजन

उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के 13 जनपदों में 16, 17 और 18 मार्च को व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल होगी, जिससे आपदा प्रबंधन तैयारियों को और मजबूत किया जाएगा।

देहरादून। राज्य में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूती प्रदान करने के लिए 16, 17 और 18 मार्च 2026 को उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा। इस अभ्यास का आयोजन विभिन्न तहसीलों में किया जाएगा, ताकि जिला मुख्यालय और तहसील स्तर पर आपदा से निपटने की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके और स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ किया जा सके।

बैठक में हुई तैयारियों की समीक्षा

शनिवार को सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें सभी जनपदों के अधिकारियों ने मॉक ड्रिल की तैयारियों के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की। इस बैठक में जनपदों ने अपने-अपने संभावित सिनेरियो तथा चयनित स्थलों के बारे में जानकारी दी। सचिव सुमन ने निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल को वास्तविक परिस्थितियों के समान आयोजित किया जाए, ताकि अभ्यास के दौरान की स्थिति को बेहतर ढंग से समझा जा सके और तैयारी का सही मूल्यांकन हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) इस पूरे अभ्यास की निगरानी करेगा।

यूएसडीएमए की नई पहल

सचिव सुमन ने बताया कि अब यूएसडीएमए स्वयं मॉक अभ्यासों को सफलतापूर्वक आयोजित करने में सक्षम हो चुका है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जनपदों को भी इस स्तर तक सक्षम बनाया जाएगा ताकि वे अपने संसाधनों के आधार पर नियमित रूप से मॉक ड्रिल का आयोजन कर सकें। इससे आपदा के समय त्वरित कार्रवाई संभव होगी और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। मॉक ड्रिल से विभागीय समन्वय, राहत और बचाव दलों की त्वरित प्रतिक्रिया, उपलब्ध संसाधनों का उपयोग प्रभावी ढंग से करना भी सुनिश्चित किया जाएगा।

आपदा प्रबंधन की रणनीतियां

इस मॉक ड्रिल के दौरान विभिन्न आपात अवस्थाओं जैसे भूकम्प, वनाग्नि, भूस्खलन, आगजनी, जलभराव, बाढ़, मानव-वन्यजीव संघर्ष, नाव पलटने की घटनाएं, बादल फटना, जलाशय विस्फोट, औद्योगिक दुर्घटनाएं, एवलांच, भगदड़ और नदी में डूबने जैसी संभावनाओं पर आधारित सिनेरियो का अभ्यास किया जाएगा। इस अभ्यास में जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशामक, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ, वन विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियां सक्रिय रूप से भाग लेंगी।

शून्य मृत्यु दर का लक्ष्य

सचिव सुमन ने कहा कि यूएसडीएमए शून्य मृत्यु दर के लक्ष्य को ध्यान में रखकर कार्य कर रहा है। यदि पहले से तैयारी मजबूत हो और सभी विभाग एक साथ मिलकर तेजी से काम करें, तो जनहानि को काफी हद तक रोका जा सकता है। यह कार्यक्रम न केवल अधिकारियों को तैयार करेगा बल्कि आम लोगों को भी आपदा प्रबंधन के बारे में जागरूक करेगा, ताकि वे अपनी और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।

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आपदा प्रबंधन की इस पहल से उम्मीद है कि उत्तराखंड में आपदाओं के प्रति बेहतर तैयारी होगी, जिससे राज्य की जनता की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

Team Amrita Bazaar Patrika

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