उत्तराखंड में अंग्रेजों के जमाने के जुए के प्रावधानों का उन्मूलन: एक सार्थक कदम
उत्तराखंड में अंग्रेजों के जमाने के जुए के प्रावधानों का उन्मूलन: एक सार्थक कदम
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड की राज्य मंत्रिमंडल ने ब्रिटिश काल के जुए के प्रावधानों को समाप्त कर दिया है, जो एक महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव को इंगित करता है।
देहरादून। शुक्रवार को आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में धामी सरकार ने कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई। इन प्रस्तावों में से एक था कर्मचारियों और आम जन के हित में अंग्रेजी काल के जुए और सट्टेबाजी से संबंधित प्रावधानों का निरस्तीकरण।
कैबिनेट की बैठक और उठाए गए प्रमुख कदम
इस बैठक में कुल पांच प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें अल्पसंख्यक आयोग से संबंधित संशोधन विधेयक और नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण निर्णय शामिल थे।
कैबिनेट ने विशेष रूप से ब्रिटिश कालीन सार्वजनिक द्यूत अधिनियम, 1867 को निरस्त करते हुए उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक, 2026 को अधिनियमित करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी। इससे जुआ, सट्टेबाजी और अवैध जुए के घरों पर रोक लगाने का रास्ता साफ हुआ है। यह कानून राज्य में सामाजिक सुरक्षा और अनुशासन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा
मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दी है। यह संशोधन अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है।
इसके अलावा, पूर्व सैनिकों को राज्य और अन्य सेवाओं में आरक्षण प्राप्त करने में मदद करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं।
नई शिक्षा योजनाएँ
बैठक में उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी स्वीकृति दी गई है, जिसके तहत राज्य में तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना की जाएगी। ये विश्वविद्यालय होंगे:
- माउंट वैली विश्वविद्यालय, नैनीताल
- तुलाज विश्वविद्यालय, देहरादून
- शिवालिक विश्वविद्यालय, देहरादून
समाज में प्रभाव
जुए और सट्टेबाजी पर रोक लगाने का यह फैसला निश्चित रूप से समाज में सकारात्मक बदलाव लाएगा। इससे विशेष रूप से युवा पीढ़ी को जुए की लत से बचाने में मदद मिलेगी और एक स्वस्थ समाज का निर्माण होगा।
उत्तराखंड की इस घोषणा ने जुए के विपरित एक नैतिक और अनुशासित समाज की दिशा में एक सकारात्मक कदम बढ़ाया है। इसके साथ ही, अल्पसंख्यकों और पूर्व सैनिकों को सुरक्षा तथा सम्मान दिए जाने का यह प्रयास भी सराहनीय है।
इस प्रकार, उत्तराखंड सरकार ने न केवल पुरानी औपनिवेशिक दायित्वों को समाप्त किया, बल्कि आधुनिकता की दिशा में एक नई सोच को भी प्रकट किया।
इस निर्णय से आने वाले समय में राज्य की शांति और विकास को बढ़ावा मिलने की संभावना है। वर्तमान समय में, सभी वर्गों को न्याय और समानता सुनिश्चित करने के प्रयासों की आवश्यकता है।
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टीम अम Rita बाजार पत्रिका
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