उत्तराखंड में जुआ और सट्टेबाजी पर सख्त कार्रवाई: 5 साल की जेल और 10 लाख तक जुर्माना
उत्तराखंड में जुआ और सट्टेबाजी पर सख्त कार्रवाई: 5 साल की जेल और 10 लाख तक जुर्माना
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड की सरकार ने जुआ खेलने वालों और सट्टेबाजों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की है। सार्वजनिक स्थानों पर जुआ खेलने वाले अब 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगत सकते हैं।
उत्तराखंड में जुआ और सट्टेबाजी की गतिविधियों में संलिप्त दोषियों के खिलाफ हालिया निर्णय के तहत न्यूनतम तीन महीने से लेकर अधिकतम पांच साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। इस पर कैबिनेट की बैठक में मुहर लग चुकी है। अब इस नए प्रावधान को उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक-2026 के रूप में आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा।
कानूनी बदलावों का उद्देश्य
वर्तमान में राज्य में केंद्र सरकार द्वारा लागू 1867 का गैंबलिंग एक्ट है, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर जुआ खेलने के लिए मामूली जुर्माने का प्रावधान था। लेकिन अब उत्तराखंड में सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक के तहत जुआ और सट्टेबाजी पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत:
- सड़क और गली में सार्वजनिक रूप से जुआ खेलने पर तीन महीने तक की साधारण कारावास या 5000 रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
- घर में जुआ खिलाने पर अधिकतम 2 साल तक की जेल या 10,000 रुपये का जुर्माना होगा।
- जुआघर चलाने पर अधिकतम 5 साल की जेल या 1 लाख रुपये का जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
- सट्टेबाजी में संलिप्त होने पर न्यूनतम 3 से 5 वर्ष तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
इस कठोर कानूनी बदलाव का मुख्य उद्देश्य राज्य में जुआ और सट्टेबाजी को समाप्त करना और इस गतिविधियों से जुड़े अपराधों को नियंत्रित करना है। विशेषज्ञ इस कदम को एक सकारात्मक पहल मानते हैं, जिसका उद्देश्य न सिर्फ कानून-व्यवस्था बहाल करना बल्कि सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित करना है।
भाषा संस्थान अधिनियम में संशोधन
इसके साथ ही, कैबिनेट ने उत्तराखंड भाषा संस्थान अधिनियम में संशोधन की मंजूरी दी है। इस संशोधन के अंतर्गत नेपाली अकादमी को शामिल किया गया है, जिससे नेपाली साहित्य को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक को भी मंजूरी दी गई है, जो नैनीताल जिले में तुलाज और शिवालिक विश्वविद्यालय स्थापित करने की प्रावधानी कर रहा है।
अल्पसंख्यक आयोग में बदलाव
उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक 2026 को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है। इस संशोधन में आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष से घटाकर तीन वर्ष किया गया है। इस आयोग का गठन वर्ष 2002 में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा और उनके सामाजिक-सामाजिक विकास के उद्देश्य से किया गया था।
इन सभी कदमों के साथ, सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह राज्य में कानून व्यवस्था और सामाजिक स्थिरता को बनाए रखने के प्रति गंभीर है। इसके साथ ही, राज्य की शिक्षा और संस्कृति को भी बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, जुआ और सट्टेबाजी से जुड़े अपराधों में बढ़ोत्तरी हुई है, जिससे यह निर्णय और भी महत्वपूर्ण बन जाता है।
राजनैतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई से समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा और युवाओं को सही दिशा में प्रेरित किया जा सकेगा।
अंत में, जुआ और सट्टेबाजी पर कठोर प्रावधान करने वाला यह विधेयक न केवल कानून के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है बल्कि यह समाज की भलाई के लिए भी सक्षम साबित हो सकता है।
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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका
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