उत्तराखंड में पशु सखी बनीं ‘डॉक्टर दीदी’, ग्रामीण महिलाओं का जीवन बदला

Apr 8, 2026 - 14:44
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उत्तराखंड में पशु सखी बनीं ‘डॉक्टर दीदी’, ग्रामीण महिलाओं का जीवन बदला
उत्तराखंड में पशु सखी बनीं ‘डॉक्टर दीदी’, ग्रामीण महिलाओं का जीवन बदला

उत्तराखंड में पशु सखी बनीं ‘डॉक्टर दीदी’, ग्रामीण महिलाओं का जीवन बदला

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के गांवों में महिलाओं ने ‘पशु सखी’ बनकर न केवल अपने जीवन को बल्कि अपने समुदाय के जीवन को भी बदल दिया है। अब गांव की महिलाएं ही घर-घर जाकर पशुओं के स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवा रही हैं, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता बढ़ी है।

पशु सखी योजना: एक नई शुरुआत

पौड़ी-गढ़वाल के दूरस्थ क्षेत्रों में रह रही महिलाएं अब सिर्फ घरेलू कामों तक सीमित नहीं रह गई हैं। राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई पशु सखी योजना के तहत, ग्रामीण महिलाएं अब ‘डॉक्टर दीदी’ बन गई हैं, जो अपने गांव में पशु चिकित्सा सेवाएं मुहैया करा रही हैं। यह योजना महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का एक प्रयास है।

सेवा में तत्पर ग्रामीण महिलाएं

इन ‘पशु सखियों’ ने न केवल पशुओं की बीमारियों का उपचार करना सीखा है, बल्कि वे जानवरों की देखभाल से संबंधित कई उपयोगी जानकारियां भी साझा करती हैं। इससे किसान भी अपने पशुओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हुए हैं और अब उन्हें लंबे समय तक पशु चिकित्सा सेवाएं प्राप्त करने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

इस योजना से जुड़ने के बाद, महिलाएं न केवल खुद का बल्कि अपने परिवार का समर्थन भी करने में सक्षम हुई हैं। गांव की महिलाएं अब न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को सुधार रही हैं, बल्कि पा रही हैं पहचान और आत्मसम्मान भी। ”पशु सखी” बनकर, ये महिलाएं अब अपने समाज के लिए एक प्रेरणा बन गई हैं।

सकारात्मक प्रभाव और चुनौतियाँ

हालांकि, इस क्षेत्र में कुछ चुनौतियाँ भी हैं। प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी, पशुधन की विविधता और पशु स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें हल करने की आवश्यकता है। लेकिन ‘पशु सखी’ कार्यक्रम का सकारात्मक प्रभाव बेहद स्पष्ट है और यह ग्रामीण महिलाओं के लिए एक नया अवसर साबित हो रहा है।

उदाहरण और प्रेरणाएँ

इस योजना के अंतर्गत कई सफल कहानियाँ सामने आई हैं। जैसे कि रीता देवी, जो अब अपने गांव की सबसे विश्वसनीय पशु स्वास्थ्य सेवा प्रदाता बन गई हैं। उन्होंने बताया, “जब मैं इस कार्य में आयी, तब मैंने सोचा नहीं था कि मैं इतनी महत्वपूर्ण काम कर सकूँगी। अब मेरे पास अपने पशुओं के लिए सफ़र करने की तौकीफ है।”

संभावनाएँ और भविष्य

कुल मिलाकर, उत्तराखंड में ‘पशु सखी’ योजना ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन लाए हैं। उनकी मेहनत और समर्पण ने न केवल उनके परिवारों का समर्थन किया बल्कि समुदायों में भी एक नई दिशा दिखायी है। अगर सरकार इस दिशा में और कार्यक्रम लाने में कामयाब होती है, तो यह एक क्रांतिकारी प्रभाव डाल सकता है।

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निष्कर्ष में, हमें उम्मीद है कि यह योजना भविष्य में और अधिक सफलताएं हासिल करेगी और और अधिक महिलाओं को आगे आने के लिए प्रेरित करेगी।

Team Amrita Bazaar Patrika - प्रिया सचदेव

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