उत्तराखंड में मकान सूचीकरण एवं गणना का कार्य 25 अप्रैल से, जानें सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ

Apr 9, 2026 - 07:44
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उत्तराखंड में मकान सूचीकरण एवं गणना का कार्य 25 अप्रैल से, जानें सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ
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उत्तराखंड में मकान सूचीकरण एवं गणना का कार्य 25 अप्रैल से, जानें सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड राज्य में जनगणना 2027 के लिए मकान सूचीकरण एवं गणना का कार्य 25 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। इस प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी सचिव जनगणना दीपक कुमार ने साझा की है।

मकान सूचीकरण एवं गणना की समय सारणी

देहरादून। सचिव जनगणना दीपक कुमार ने बताया कि भारत की जनगणना 2027 के पहले चरण में उत्तराखंड राज्य में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 25 अप्रैल, 2026 से 24 मई, 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान नियुक्त प्रगणक घर-घर जाकर लोगों से जानकारी एकत्र करेंगे।

इसके अतिरिक्त, 10 अप्रैल, 2026 से 24 अप्रैल, 2026 तक मकान सूचीकरण एवं मकानों की स्व-गणना का कार्य भी संचालित किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण चरण जनगणना-2027 के लिए आवश्यक आंकड़ों के संग्रहण में सहायता करेगा। जनगणना के दूसरे चरण के अंतर्गत (जनसंख्या गणना) 09 फरवरी, 2027 से 28 फरवरी, 2027 तक प्रक्रिया जारी रहेगी।

स्व-गणना और उसकी प्रक्रिया

स्व-गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया 10 अप्रैल से शुरू होगी, जहां परिवार के मुखिया को एक मोबाइल नंबर एवं नाम दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस वेब पोर्टल पर विवरण दर्ज करना अनिवार्य है: https://se.census.gov.in।

पंजीकरण के समय एक बार दर्ज किया गया नाम बाद में नहीं बदला जा सकेगा। भाषा का चयन भी बहुत ध्यानपूर्वक करना होगा क्योंकि ओटीपी सत्यापन के बाद इसे बदला नहीं जाएगा। स्व-गणना पूरी करने में लगभग 15 से 20 मिनट का समय लगेगा और यह जानकारी गोपनीय रखी जाएगी।

प्रशासनिक तैयारी

सचिव जनगणना ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में जनगणना-2027 के लिए जिलाधिकारी एवं नगर आयुक्त को प्रमुख जनगणना अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भी विभिन्न जिम्मेदारियों के अनुसार नियुक्त किया गया है। वर्तमान में, 23 मास्टर ट्रेनर्स एवं 555 फील्ड ट्रेनर्स द्वारा प्रशिक्षण पूर्ण कर लिया गया है।

विशेष प्रावधानों के तहत, हिमाच्छादित क्षेत्रों में स्थित 131 गांव एवं 3 नगरों के लिए जनगणना का कार्य 11 सितंबर, 2026 से 30 सितंबर, 2026 तक किया जाएगा।

जनगणना का महत्व

भारत में पहली जनगणना 1872 में हुई थी, और आजादी के बाद पहली जनगणना 1951 में संपन्न हुई थी। COVID-19 के कारण 2021 में जनगणना आयोजित नहीं की जा सकी। जनगणना 2027, भारत की 16वीं जनगणना होगी, जिसमें जातिगत जनगणना भी शामिल होगी। यह पहली बार होगा जब पूरा कार्य डिजिटल माध्यम से संपादित किया जाएगा और इसे मोबाइल एप्लिकेशन के द्वारा किया जाएगा।

सचिव ने राज्य के सभी नागरिकों से अपील की है कि घर पर आए जनगणना प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को आवश्यक जानकारी प्रदान करें और अधिक से अधिक संख्या में स्व-गणना (Self Enumeration) करें।

निदेशक जनगणना कार्य, गृह मंत्रालय भारत सरकार, श्रीमती ईवा श्रीवास्तव, नगर आयुक्त नमामि बंसल एवं अन्य अधिकारी भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

इस विषय में अधिक अपडेट के लिए, कृपया हमारी वेबसाइट पर जाएं: https://amritabazaarpatrika.com

सभी जानकारी के लिए धन्यवाद।

— Team Amrita Bazaar Patrika (नंदिनी शर्मा)

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