उत्तराखंड: शिक्षा का अधिकार (RTE) तहत निजी स्कूलों में ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया शुरू

Sep 15, 2026 - 14:44
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उत्तराखंड: शिक्षा का अधिकार (RTE) तहत निजी स्कूलों में ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया शुरू

उत्तराखंड में छात्रों के लिए बड़ा अवसर: RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया शुरू

चम्पावत, 15 सितम्बर: शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में अपवंचित एवं कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए 25% सीटों पर द्वितीय चरण की ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के साथ, जिलाधिकारी ने इसकी शत-प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं।

कम शब्दों में कहें तो: शिक्षा का अधिकार के तहत उत्तराखंड में निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए द्वितीय चरण की ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य अपवंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है।

शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम का महत्व

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 में लागू हुआ था, जिसका उद्देश्य सभी बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना है। इस अधिनियम की धारा 12(1)(c) यह सुनिश्चित करती है कि गैर-सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों में 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हों। इस कदम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा में समानता लाना और समाज के पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाना है।

ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के बारे में विवरण

द्वितीय चरण की ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के तहत, इच्छुक अभिभावक शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि की घोषणा के साथ, शासन ने सभी अभिभावकों से अनुरोध किया है कि वे समय सीमा के भीतर अपने बच्चों के लिए आवेदन करें। यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी, जिससे अभिभावकों को आसानी होगी।

जिलाधिकारी के संकेत

जिलाधिकारी ने यह भी निर्देशित किया है कि सभी स्कूलों को इस प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता है। इसके तहत स्कूलों को सभी आवेदन पत्रों और चयन प्रक्रिया को सामान्य जन के लिए उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रांति या अन्याय की स्थिति उत्पन्न न हो।

अवसर और चुनौतियाँ

इस प्रक्रिया से न केवल शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित होगा, बल्कि यह सामाजिक समावेशिता को भी बढ़ावा देगा। हालाँकि, इस प्रक्रिया के साथ कुछ चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं, जैसे अभिभावकों द्वारा आवेदन की जानकारी और समय प्रबंधन। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ताकि सभी वर्गों के अभिभावक सही समय पर आवेदन कर सकें।

अंततः, यह प्रक्रिया उत्तराखंड में शिक्षा के स्तर को ऊँचा उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। समय की संवेदनशीलता को देखते हुए, सभी अभिभावकों को अपनी तैयारी जल्द से जल्द पूरी करने की सलाह दी जा रही है।

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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका, सृष्टि देसाई

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