उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की झांकी को मिला द्वितीय स्थान, सांस्कृतिक धरोहर का हुआ प्रदर्शन
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की झांकी को मिला द्वितीय स्थान, सांस्कृतिक धरोहर का हुआ प्रदर्शन
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की झांकी ने गणतंत्र दिवस परेड में द्वितीय स्थान प्राप्त कर प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को और भी प्रशंसा दिलाई है।
हरिद्वार: गणतंत्र दिवस के मौके पर देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य परेड में उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की झांकी ने प्रदेश स्तर पर द्वितीय स्थान हासिल किया है। झांकी की इस उपलब्धि पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक गैरोला और संस्कृत अकादमी के सचिव प्रो. मनोज किशोर पंत को ट्रॉफी प्रदान की। यह पुरस्कार संस्कृत शिक्षा के प्रति प्रदेश की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
संस्कृत ग्रामों की जीवंत झलक
संस्कृत अकादमी की झांकी में उत्तराखंड के 13 संस्कृत ग्रामों की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं का प्रभावी प्रदर्शन किया गया। प्रत्येक ग्राम की विशेषताएं, उनकी सांस्कृतिक विरासत और संस्कृत भाषा का महत्व इस झांकी के माध्यम से दर्शाया गया। दर्षकों और निर्णायकों के बीच इस झांकी ने विशेष आकर्षण उत्पन्न किया, जो दर्शाता है कि संस्कृत कला और संस्कृति की कितनी गहरी जड़ें हैं।
इस उपलब्धि ने संस्कृत शिक्षकों, छात्रों और विद्वानों के बीच उत्साह का संचार किया है। सचिव दीपक गैरोला ने इस पर गर्व करते हुए कहा कि यह सफलता संस्कृत भाषा के संरक्षण और विकास के लिए अकादमी के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
अकादमी की टीम का योगदान
संस्कृत अकादमी के सचिव प्रो. मनोज किशोर पंत ने भी इस सफलता का श्रेय अपनी टीम के सभी सदस्यों को दिया। उन्होंने कहा, "हमने सीमित संसाधनों में भी यह सफलता पाई है। यह सब टीम भावना और समर्पण का परिणाम है।" प्रो. पंत ने आगे कहा कि भविष्य में संस्कृत अकादमी और भी बेहतर प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन करेगी।
संस्कृत शिक्षा में ऐसे प्रयास न केवल छात्रों को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को जानने और समझने में भी सहायक होते हैं। संस्कृत अकादमी की इस झांकी ने हमें यह जानकारी दी है कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं को संरक्षित करने की आवश्यकता है।
इस प्रकार, उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की यह झांकी न केवल एक प्रतियोगिता में विजेता रही, बल्कि यह हमारे संस्कृतिक सम्मेलनों का प्रतीक भी है। ऐसे प्रयास आगे भी जारी रखने की जरूरत है ताकि हमारी समृद्ध संस्कृति को समूचे देश और विश्व के सामने प्रदर्शित किया जा सके।
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सादर,
टीम अम Rita Bazaar Patrika
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