उत्तराखंड हाईकोर्ट की कड़ी नाराजगी: उपनल संविदा कर्मचारियों को चयनित वेतनमान नहीं दिए जाने पर सुनवाई जारी

May 14, 2026 - 21:44
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उत्तराखंड हाईकोर्ट की कड़ी नाराजगी: उपनल संविदा कर्मचारियों को चयनित वेतनमान नहीं दिए जाने पर सुनवाई जारी
उत्तराखंड हाईकोर्ट की कड़ी नाराजगी: उपनल संविदा कर्मचारियों को चयनित वेतनमान नहीं दिए जाने पर सुनवाई जारी

उत्तराखंड हाईकोर्ट की कड़ी नाराजगी: उपनल संविदा कर्मचारियों को चयनित वेतनमान नहीं दिए जाने पर सुनवाई जारी

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कम शब्दों में कहें तो, नैनीताल हाईकोर्ट ने उपनल संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और चयनित वेतनमान से संबंधित गंभीर मुद्दों पर राज्य सरकार की नाकामियों पर अपनी नाराजगी जताई है। अब इस मुद्दे पर पुनः सुनवाई होगी।

संविदा कर्मचारियों का मुद्दा

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी विभागों में वर्षों से काम कर रहे उपनल संविदा कर्मचारियों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। इन कर्मचारियों को न केवल नियमित नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें अपेक्षित चयनित वेतनमान भी नहीं दिया जा रहा है। इसके साथ ही, उनके वेतन से जीएसटी काटे जाने का मामला भी उठाया गया है। यह सभी मुद्दे आज कोर्ट में दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आए।

यह सुनवाई क्यों महत्वपूर्ण है?

यह सुनवाई केवल उपनल संविदा कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि सभी संविदा कर्मचारियों के अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। यह स्पष्ट करता है कि सरकार को अपने वादों का पालन करना चाहिए और कर्मचारियों को उनका हक मिलना चाहिए। कर्मचारियों के इस मुद्दे के पीछे कई ऐसे कारक हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सरकार की लापरवाही

समय-समय पर सरकारी अधिकारियों ने इन कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। कर्मचारियों के वेतन में कटौती और अनियमितताओं के इस मामले ने प्रदेश में सामाजिक अशांति को जन्म दिया है। यदि सरकार नहीं जागी, तो यह एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

अगली सुनवाई का दिन

अगली सुनवाई की तारीख भी तय कर दी गई है, जो कि इन संविदा कर्मचारियों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगी। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि सरकार अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में विफल रही, तो उचित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

निष्कर्ष

इस पूरे मसले को लेकर कर्मचारियों में चिंता और असंतोष बढ़ रहा है। लोग चाहते हैं कि सरकार इस मुद्दे को प्राथमिकता दे और शीघ्र कार्रवाई करे। यदि उपनल संविदा कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा नहीं की जाती, तो यह मामला लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।

सभी संविदा कर्मचारियों को अपने अधिकारों के बारे में जागरूक होना अति आवश्यक है। वे अपनी आवाज को उठाने के लिए संगठित हो सकते हैं और न्याय की मांग कर सकते हैं।

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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका
(श्रेया तिवारी)

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