उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता (UCC) संशोधन अध्यादेश 2026 का ऐतिहासिक आगाज

Jan 27, 2026 - 00:44
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उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता (UCC) संशोधन अध्यादेश 2026 का ऐतिहासिक आगाज
उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता (UCC) संशोधन अध्यादेश 2026 का ऐतिहासिक आगाज

उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता (UCC) संशोधन अध्यादेश 2026 का ऐतिहासिक आगाज

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखण्ड सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) संशोधन अध्यादेश, 2026 को लागू कर दिया है, जो विभिन्न प्रक्रियाओं और दंड योजनाओं में सुधार का वादा करता है।

देहरादून। उत्तराखण्ड सरकार ने 2024 में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) में आवश्यक संशोधनों हेतु समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को लागू किया है। यह सुधार राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की स्वीकृति के बाद तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।

संविधानिक मान्यता और प्रभावी बदलाव

यह अध्यादेश संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत किया गया है। इसके माध्यम से संहिता के अंतर्गत किए गए संशोधन प्रशासनिक, प्रक्रियात्मक और दंडात्मक सुधारों का संग्रह बनाएंगे, जिससे कि इस संहिता का अधिक पारदर्शी और प्रभावी रूप से क्रियान्वयन किया जा सके।

प्रमुख बिंदु

  • नए सुरक्षा प्रावधान: आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 के स्थान पर अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत कार्यवाही की जाएगी।
  • अपर सचिव की नियुक्ति: धारा 12 में "सचिव" के स्थान पर "अपर सचिव" को सक्षम प्राधिकारी के रूप में नामित किया गया है।
  • प्रक्रिया का आसान बनना: उप-पंजीयक द्वारा समय सीमा में कार्यवाही न करने पर, प्रकरण स्वतः पंजीयक और पंजीयक जनरल को अग्रेषित किया जाएगा।
  • दंड का अधिकार: उप-पंजीयक पर लगाए गए दंड के विरुद्ध अपील का अधिकार देने के साथ-साथ, दंड की वसूली भू-राजस्व की तरह की जाएगी।
  • शादी की पहचान: विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत प्रस्तुति अब विवाह निरस्तीकरण का आधार बनेगी।
  • कठोर दंडात्मक प्रावधान: विवाह और लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी या विधि-विरुद्ध कृत्यों पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।
  • लिव-इन संबंध का प्रमाण: लिव-इन संबंध की समाप्ति पर पंजीयक द्वारा समाप्ति प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
  • शब्द प्रतिस्थापन: अनुसूची-2 में "विधवा" शब्द को "जीवनसाथी" से प्रतिस्थापित किया गया है।
  • पंजीकरण की शक्ति: विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध और उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण को निरस्त करने का अधिकार पंजीयक जनरल को दिया गया है।

उद्देश्य और महत्व

इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य समान नागरिक संहिता के प्रावधानों को अधिक स्पष्ट, प्रभावी और व्यावहारिक बनाना है। यह प्रशासनिक दक्षता को सुदृढ़ करने और नागरिकों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। इस अध्यादेश के माध्यम से, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि नागरिकों के अधिकारों का संरक्षण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर ध्यान देना प्राथमिकता है।

इन बदलावों के साथ, राज्य की सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि सभी नागरिक कानूनों के समक्ष समान हो, और समाज में न्याय का एक मजबूत आधार हो। इसके साथ ही, यह राज्य का सांस्कृतिक और सामाजिक विकास भी करेगा।

अंत में, यह अध्यादेश उत्तराखण्ड में एक सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। सभी नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि उनके अधिकार सुरक्षित हैं और कानून का पालन करने में उन्हें सचेत किया गया है।

फिर से सुनिश्चित करें कि समान नागरिक संहिता का प्रभावी कार्यान्वयन सभी के हित में हो। इसके लिए राज्य और नागरिक, दोनों को एकजुट होकर प्रयास करने की आवश्यकता है। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।

टीम अमृता बाजार पत्रिका

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