एआई और कानून का समन्वय: भविष्य की अनिवार्यता

Jul 3, 2026 - 21:44
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एआई और कानून का समन्वय: भविष्य की अनिवार्यता
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कम शब्दों में कहें तो, आज के डिजिटल युग में एआई और कानून का समन्वय अत्यंत आवश्यक हो चुका है। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय के साथ कानून शिक्षा में एआई, लीगल टेक्नोलॉजी, और डेटा सुरक्षा जैसे विषयों को शामिल करना नितांत आवश्यक है।

देहरादून के ग्राफिक एरा डेम्ड यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ लॉ में आयोजित बोर्ड ऑफ स्टडीज़ की बैठक में विधि विशेषज्ञों ने इस विषय पर गहराई से चर्चा की। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालयों का लक्ष्य केवल कानून की डिग्री प्रदान करना नहीं होना चाहिए, बल्कि छात्रों को नैतिक, सक्षम, और व्यावहारिक दृष्टि से दक्ष अधिवक्ता तैयार करने का भी होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड आर.एच.ए. सिकंदर का मानना है कि कानूनी क्षेत्र में व्यावसायिक कौशल जैसे कि ड्राफ्टिंग और शोध अनिवार्य हो गए हैं। छात्रों को सिम्युलेटेड कोर्ट कार्यवाही, केस विश्लेषण, और न्यायाधीशों के साथ नियमित संवाद का अवसर मिलना चाहिए ताकि वे वास्तविक जीवन की चुनौतियों का सामना कर सकें।

वाडिया गांधी एंड कंपनी, नई दिल्ली के पार्टनर चिरंजीवी शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल परिवर्तन के दौर में विधिक क्षेत्र की अपेक्षाएँ तेजी से बदल रही हैं। इस बदलाव के अनुरूप विधि पाठ्यक्रम में कॉर्पोरेट कंप्लायंस और कॉन्ट्रैक्ट ड्राफ्टिंग जैसे विषयों को शामिल करने की आवश्यकता है।

बोर्ड ऑफ स्टडीज की इस बैठक में लखनऊ की डा. राम मनोहर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति डा. ए. पी. सिंह, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ लॉ की डीन डा. ममता राणा और देहरादून के डीएवी (पीजी) कॉलेज के लॉ डिपार्टमेंट की हेड डा. पारुल दीक्षित ने भी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराई।

बैठक का संचालन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ लॉ के हेड डा. आशुतोष हजेला ने किया। इस अवसर पर डा. शैलजा ठाकुर, डा. समता कथूरिया और अन्य शिक्षक शिक्षिकाएं भी उपस्थित रहे।

इस समर्पित बैठक में सभी विद्वानों ने सहमति जताई कि कानून शिक्षा को नई तकनीकों के साथ समन्वयित करना आवश्यक है। आने वाले समय में विधिक क्षेत्र की चुनौतियों का सामना करने के लिए छात्रों को पहले से ही तैयार किया जाना चाहिए।

बदलते समय की इस चाहत में भविष्य की विधि शिक्षा को नई दिशा देने का यह प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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टीम अमृता बाजार पत्रिका, पूर्विका शर्मा

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