काठ बंगला बस्ती का मुद्दा: निगम की शपथ पत्र पर सबकी नज़रें

May 18, 2026 - 07:44
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कम शब्दों में कहें तो, काठ बंगला बस्ती में विस्थापन पर उच्च न्यायालय ने रोक लगाई है, जिससे स्थानीय जन संगठनों में पुनर्वास नीति को लेकर चिंता बढ़ गई है। नगरीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

नैनीताल/देहरादून। स्थानीय काठ बंगला बस्ती के जबरन विस्थापन के मामले में उच्च न्यायालय ने यथास्थिति की रोक लगाई है। इस निर्णय के बाद नगर निगम को तीन हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। अगले उत्तरदाता 27 मई को समाप्त हो रहा है। इस बीच, नागरिक संगठनों ने 30 मई तक विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है, जिससे स्थिति तनावपूर्ण बन चुकी है।

विपक्षी दलों और विभिन्न जन संगठनों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि वह राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशों को लेकर भ्रमित करने की कोशिश कर रही है और वास्तविक कार्रवाई से दूरी बना रही है। उनके अनुसार, 2016 का मलिन बस्ती अधिनियम प्रभावी नहीं है और कार्यांवयन की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

जन संगठनों ने मांग की है कि उच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह एनजीटी में लंबित याचिका की स्थिति अदालत में प्रस्तुत करे। आठ महीनों से प्रभावित परिवार इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने उनकी चिंताओं की अनदेखी की है। इसी कारण, 30 मई तक सरकार के खिलाफ अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है।

हाईकोर्ट में सुनवाई का महत्वपूर्ण दिन

6 मई को, काठ बंगला बस्ती के तीन परिवारों द्वारा दायर याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीश सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि 2016 और 2018 के अधिनियमों का उल्लंघन करते हुए उन्हें मकान खाली करने के नोटिस प्रदान किए गए। उनका कहना है कि प्रशासन उन्हें असुरक्षित फ्लैटों में पुनर्वास के लिए मजबूर कर रहा है।

काठ बंगला बस्ती

इस पर खंडपीठ ने नगर निगम को विस्तृत योजना और एनजीटी मामले की स्थिति पर जवाब देने के लिए निर्देश दिया है। नगर निगम द्वारा 27 मई तक शपथ पत्र दाखिल किये जाने की आवश्यकता है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि अपीलकर्ताओं से संबंधित संरचनाएं एनएमसीजी द्वारा हटाने के लिए चिन्हित की गई हैं या नहीं।

काठ बंगला क्षेत्र

प्रशासन ने हाल ही में काठ बंगला क्षेत्र की निवासियों को 116 परिवारों को बेदखल करने का नोटिस दिया था। निवासियों का कहना है कि उन्हें दिए जा रहे फ्लैट असुरक्षित हैं, और एक परिवार के लिए केवल एक कमरा आवंटित किया जा रहा है, जो कि बड़े परिवारों के लिए पर्याप्त नहीं है। इसी कारण स्थानीय लोग इन फ्लैटों में जाने का विरोध कर रहे हैं।

प्रशासन और निवासियों के बीच गतिरोध

विस्थापन और पुनर्वास को लेकर स्थानीय निवासियों और प्रशासन के बीच गतिरोध बना हुआ है। निवासियों ने आरोप लगाया है कि अन्य क्षेत्रों में निर्माणाधीन संरचनाओं के खिलाफ प्रशासन को कोई कार्रवाई नहीं दिखाई जाती है लेकिन उनके घरों को निशाना बनाया जा रहा है।

इस स्थिति ने उन निवासियों के जीवन जीने की गुणवत्ता पर गहरा प्रभाव डाला है जो इनमें से अधिकांश भी आर्थिक रूप से कमजोर हैं। ये सभी गहरी आशंकाओं के साथ अपने भविष्य की चिंता कर रहे हैं।

सुरक्षा और नीति की अनुपस्थिति

निवासियों का सवाल है कि जब सरकारी योजनाओं के तहत वे सुरक्षित नहीं हैं, तो उन्हें क्यों हटाया जा रहा है? प्रशासन की मुआवजे की नीति भी अस्पष्ट है, जिसके कारण प्रभावित परिवारों को यथासंभव न्याय की उम्मीद है।

काठ बंगला बस्ती का यह मामला सिर्फ एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि यह ऐसे कई मुद्दों का प्रतिनिधित्व करता है जो शहरी विकास, पुनर्वास नीति, और मूलभूत मानवाधिकारों से जुड़े हैं।

अपडेट्स के लिए हमारे साथ बने रहें: Amrita Bazaar Patrika।

सादर,
Team Amrita Bazaar Patrika, स्मिता शर्मा

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